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15 साल में पहली बार… सरकार ने हेल्थ पर क्यों घटा दिया खर्च?

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नई दिल्‍ली

हेल्‍थ पर सरकार का खर्च 2004-05 से 2017-18 तक लगातार बढ़ा। जीडीपी के प्रतिशत के तौर पर इस दौरान सरकारी खर्च में कभी कमी नहीं आई। यह और बात है कि 2018-19 में इस दौरान पहली बार यह घटकर जीडीपी का सिर्फ 1.3 प्रतिशत रह गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुमान के आंकड़ों से इसका पता चलता है। इन 15 सालों में हेल्‍थ पर कुल खर्च GDP के प्रतिशत के तौर पर 4.2 फीसदी से घटकर 3.2 फीसदी रह गया। कुल सरकारी स्वास्थ्य खर्च में केंद्र की हिस्सेदारी 2018-19 में गिरकर 34.3 फीसदी हो गई। यह पिछले साल 40.8 फीसदी थी। वहीं, इसी अवधि के दौरान राज्यों की हिस्सेदारी 59.2 फीसदी से बढ़कर 65.7 फीसदी हो गई। किसी भी वेलफेयर स्‍टेट में हेल्‍थ और एजुकेशन के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। हेल्‍थकेयर पर जीडीपी का 3 प्रतिशत खर्च स्‍वीकार्य स्‍तर बन चुका है। यहां तक इकनॉमिक सर्वे 2021 में भी हेल्‍थ पर स्‍वास्‍थ्‍य खर्च को 2.5 फीसदी से बढ़ाकर 3 फीसदी करने की बात कही गई थी। इस टारगेट से इसका दूर होना चिंता की बात है। केंद्र सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि इस ट्रेंड को पलटा जा सके।

इसी अवधि के दौरान कुल स्वास्थ्य खर्च के प्रतिशत के रूप में ‘आउट ऑफ पॉकेट’ खर्च भी 48.8 प्रतिशत से गिरकर 48.2 फीसदी हो गया। हालांकि, 2013-14 के आंकड़ों की तुलना में स्वास्थ्य पर ‘आउट ऑफ पॉकेट’ 64.2 प्रतिशत से 16 प्रतिशत कम हो गया। आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त करने पर परिवारों की ओर से सीधे किया जाने वाला खर्च है। यह स्वास्थ्य देखभाल भुगतान के लिए परिवारों के लिए उपलब्ध वित्तीय सुरक्षा की सीमा को दर्शाता है।

हेल्‍थ पर प्रति व्‍यक्‍ति खर्च बढ़ा
बात जब कुल स्वास्थ्य व्यय की आती है, तो यह 2018-19 में जीडीपी के 3.2 प्रतिशत तक गिर गया। वहीं, उसके पिछले वर्ष में यह 3.3 प्रतिशत और 2013-14 में चार प्रतिशत था। इस संदर्भ में सबसे नवीनतम आंकड़ा 2018-19 के लिए ही उपलब्ध है। कुल स्वास्थ्य खर्च सरकार और बाहरी फंडों समेत निजी स्रोतों की ओर से मौजूदा और पूंजीगत खर्च से निर्धारित होता है। सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में यह किसी देश के आर्थिक विकास के सापेक्ष स्वास्थ्य व्यय को इंगित करता है।

प्रति व्यक्ति कुल स्वास्थ्य व्यय 2018-19 में बढ़कर 4,470 रुपये प्रति व्यक्ति हो गया। यह देश में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च को वर्तमान कीमतों में दिखाता है। यह उससे पिछले साल 4,297 रुपये और 2013-14 में 3,638 रुपये था। स्वास्थ्य देखभाल खर्च के लिए सामाजिक सुरक्षा तंत्र 2013-14 में छह प्रतिशत से बढ़कर 2018-2019 में 9.6 प्रतिशत हो गया। राज्‍यों में जिस राज्‍य ने हेल्‍थ पर अपने जीएसडीपी का सबसे ज्‍यादा हिस्‍सा खर्च किया उनमें हिमाचल प्रदेश अव्‍वल है। इसके बाद असम, बिहार, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ का नंबर आता है।बड़े मुल्‍कों में ज्‍यादातर का स्‍वास्‍थ्‍य पर खर्च जीडीपी के प्रतिशत के तौर पर भारत से कहीं ज्‍यादा है।

देश हेल्‍थ एक्‍सपेंडिचर (जीडीपी के % के तौर पर)
अमेरिका 19.7
चीन 5.35
जापान 10.74
जर्मनी 11.70
ब्रिटेन 10.15
इटली 8.67
ऑस्‍ट्रेलिया 9.91
इजरायल 7.46

 

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