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इजराइल-फिलिस्तीन युद्ध से सोने में लगी आग, रॉकेट बनी कीमतें, चांदी में भी जबरदस्त उछाल, कब तक रहेगी तेजी?

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नई दिल्ली

सदियों से सोना धन और समृद्धि का प्रतीक रहा है। लेकिन जब भी कोई भू-राजनीतिक संकट आता है, सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं। इजराइल और फिलिस्तीन के बीच युद्ध के चलते फिर से सोने की कीमतें बढ़ने लगी हैं। इजराइल ने पिछले शनिवार, 7 अक्टूबर को गाजा पर हवाई हमले शुरू किये थे। बीते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सोने और चांदी की घरेलू वायदा कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया था।

सोने-चांदी में जबरदस्त उछाल
एमसीएक्स एक्सचेंज पर शुक्रवार को 5 दिसंबर 2023 की डिलीवरी वाले सोने की कीमत 2.58 फीसदी या 1497 रुपये की जबरदस्त उछाल के साथ 59,415 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई। सोने के साथ ही चांदी की कीमतों (Silver Rate Today) में भी शुक्रवार को जबरदस्त उछाल दर्ज हुई थी। एमसीएक्स पर शुक्रवार को 5 दिसंबर 2023 की डिलीवरी वाली चांदी 3.32 फीसदी या 2294 रुपये की बढ़त के साथ 71,368 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।

​रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी बढ़े थे भाव
सोने में उछाल रूस-यूक्रेन युद्ध के समय भी देखी गई थी। रूस-यूक्रेन युद्ध 24 फरवरी 2022 को शुरू हुआ था। इसके बाद 7 मार्च 2022 को सोने की घरेलू कीमतों में लगभग 1000/10 ग्राम की वृद्धि हुई थी। 22 कैरेट सोने की कीमत 49,400/10 ग्राम और 24 कैरेट सोने की कीमत 53,890/10 ग्राम पर पहुंच गई थी।

​भू-राजनीतिक संघर्ष और सोने पर इसका प्रभाव
बड़ा सवाल यह है कि क्या सोने में तेजी जारी रहेगी और कब तक जारी रहेगी? आर्थिक संकट से सोने को फायदा होता है, क्योंकि निवेशक जोखिम भरे एसेट से दूर रहते हैं और सेफ हैवन सोने में पैसा लगाते हैं। विंट वेल्थ के को-फाउंडर सीआईओ अंशुल गुप्ता ने कहा, ‘कई लोग, व्यवसाय और यहां तक कि सरकारें भी प्रतिकूल समय में बचाव के लिए अपने पोर्टफोलियो में सोना रखते हैं। यह इंश्योरेंस की तरह काम करता है। यूक्रेन-रूस और इजरायल-फिलिस्तीन के बीच चल रहा संघर्ष दीर्घकालिक भू-राजनीतिक समीकरणों, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और वित्तीय साधनों में विश्वास को बाधित कर सकता है। इस तरह के जोखिमों को कम करने के लिए, निवेशक पीली धातु के लिए अपना आवंटन बढ़ाते हैं। यहां एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि निवेशक आर्थिक मंदी जैसे परिदृश्यों में किसी भी संप्रभु-समर्थित सोने की प्रतिभूतियों पर भौतिक सोने को प्राथमिकता देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि संप्रभु-समर्थित सोना सरकार द्वारा केवल एक वचन पत्र है।’

क्या जारी रहेगी तेजी?
2021 और 2022 में एक मजबूत उछाल के बाद इस साल अब तक सोने का प्रदर्शन खराब रहा है। सैंक्टम वेल्थ के निवेश उत्पादों के प्रमुख अलेख यादव ने कहा, ‘इक्विटी में मजबूत तेजी और आकर्षक बॉन्ड यील्ड ने भी सोने पर असर डाला है, क्योंकि निवेशक सोने के बजाय अन्य एसेट्स में निवेश करने चले गए थे। हालांकि, अब इजराइल-फिलिस्तीन के मुद्दे और भू-राजनीतिक जोखिमों में वृद्धि के चलते हमें लगता है कि सोने की तरफ निवेशकों का आकर्षण बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि सोने ने आम तौर पर भू-राजनीतिक जोखिमों और इक्विटी अस्थिरता के खिलाफ एक अच्छे बचाव के रूप में काम किया है।’ पोर्टफोलियो की विविधता को बढ़ाने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में सोने को सबसे पहले चुना जाता है।

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