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मालदीव के साथ ‘कबीर पॉलिसी’! भारत ने प्याज, चावल, आटा, चीनी के एक्‍सपोर्ट पर क्‍यों हटाया बैन

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नई दिल्ली

संत कबीर दास का एक दोहा है। जो तोको कांटा बुवै, ताहि बोइ तू फूल। तोहे फूल के फूल हैं, वाको हैं त्रिशूल। मालदीव पर भारत ने वही कबीर पॉलिसी चल दी है। कांटा बोने वाले मालदीव पर मोदी सरकार ने फूल उछाल दिया है। भारत ने चालू वित्त वर्ष के दौरान माल‍दीव को अंडे, आलू, प्याज, चावल, गेहूं का आटा, चीनी और दाल जैसी कुछ वस्तुओं की तय मात्रा के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को शुक्रवार को हटा दिया। इस कदम के कारण अब भारत से मालदीव को पिछले साल के मुकाबले ज्यादा मात्रा में अंडे, आलू, प्याज, चीनी, चावल, गेहूं का आटा और दाल सहित आवश्यक वस्तुओं का निर्यात हो सकेगा। इसके अलावा मालदीव को भारत से भेजे जाने वाले नदी की रेत और पत्थरों का भी कोटा बढ़ाया गया है। मोदी सरकार ने यह फैसला तब किया है जब मालदीव की मुइज्जू सरकार एक के बाद एक भारत विरोधी फैसले ले रही है।

भारत-मालदीव रिश्तों में तनाव
मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू को चीन समर्थक नेता माना जाता है। उनके राष्ट्रपति बनने के बाद से भारत और मालदीव के रिश्तों में तनाव देखने को मिला है। मुइज्जू ने चीन के साथ एक सैन्य समझौता भी किया है। इसके तहत मालदीव के द्वीप पर चीन को मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्टर विकसित करने की छूट मिल गई है।

भारत ने चालू वित्त वर्ष के दौरान मालदीव को अंडे, आलू, प्याज, चावल, गेहूं का आटा, चीनी और दाल जैसी कुछ वस्तुओं की निर्दिष्ट मात्रा के निर्यात पर बैन शुक्रवार को हटा दिया। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक अधिसूचना में कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत मालदीव को इन वस्तुओं के निर्यात की अनुमति दी गई है।

DGFT ने क्‍या बताया है?
डीजीएफटी ने कहा, ‘मालदीव को अंडे, आलू, प्याज, चावल, गेहूं का आटा, चीनी, दाल, बजरी और नदी की रेत के निर्यात की अनुमति दी गई है… मालदीव को इन वस्तुओं के निर्यात को किसी भी मौजूदा या भावी प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी।’आमतौर पर इन वस्तुओं के निर्यात पर या तो पूरी तरह प्रतिबंध है या सीमित निर्यात की अनुमति दी जाती है। निर्यात के लिए निर्दिष्ट मात्रा में आलू (21,513.08 टन), प्याज (35,749.13 टन), चावल (1,24,218.36 टन), गेहूं का आटा (1,09,162.96 टन), चीनी (64,494.33 टन), दाल (224.48 टन), बजरी (10 लाख टन) और नदी की रेत (10 लाख टन) शामिल हैं।

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