4.7 C
London
Saturday, March 21, 2026
HomeUncategorizedलोकसभा चुनाव से पहले सरकारी कंपनियां नहीं बेचेगी मोदी सरकार, मिस हो...

लोकसभा चुनाव से पहले सरकारी कंपनियां नहीं बेचेगी मोदी सरकार, मिस हो जाएगा डिसइनवेस्टमेंट का टारगेट!

Published on

नई दिल्ली

लोकसभा चुनावों में अब कुछ ही महीने रह गए हैं। आम चुनाव नजदीक आने के साथ ही सरकार ने अपनी निजीकरण की कार्रवाई लगभग रोक दी है और अब शेयर बाजारों में अल्पांश हिस्सेदारी बेचने का विकल्प चुना है। कुछ चुनिंदा घरानों को हिस्सेदारी बेचने के विपक्षी दलों के आरोपों के बीच सरकार ने यह कदम उठाया है। हालांकि, इसके परिणामस्वरूप चालू वित्त वर्ष 2023-24 के विनिवेश लक्ष्य से फिर चूकने की आशंका है। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और कॉनकॉर जैसी बड़ी निजीकरण योजनाएं पहले से ही ठंडे बस्ते में हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सार्थक निजीकरण अप्रैल/मई के आम चुनाव के बाद ही हो सकता है।

चालू वित्त वर्ष 2023-24 में 51,000 करोड़ रुपये की बजट राशि में से करीब 20% यानी 10,049 करोड़ रुपये आईपीओ और ओएफएस के माध्यम से अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री के जरिए एकत्र किए गए। एससीआई, एनएमडीसी स्टील लिमिटेड, बीईएमएल, एचएलएल लाइफकेयर और आईडीबीआई बैंक सहित कई केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों की रणनीतिक बिक्री चालू वित्त वर्ष में पूरी होने वाली है। हालांकि, अधिकांश सीपीएसई के संबंध में मुख्य एवं गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों की विभाजन की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है और वित्तीय बोलियां आमंत्रित करने में देरी हुई है।

कितने मामले हैं लंबित
कुल मिलाकर करीब 11 ट्रांजैक्शन अभी दीपम में लंबित हैं। वहीं राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर) और एआई एसेट होल्डिंग लिमिटेड के निजीकरण के लिए आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) की सैद्धांतिक मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। लेकिन दीपम विभाग ने अब तक इनके लिए ईओआई आमंत्रित नहीं किए हैं। एक बाजार विशेषज्ञ ने कहा, ‘रणनीतिक विनिवेश निर्णय राजनीतिक आवश्यकताओं से संचालित हो रहे हैं। चुनाव नजदीक होने के कारण हमें रणनीतिक बिक्री के मामले में कोई हलचल की उम्मीद नहीं है।’

देश में अगले साल अप्रैल-मई में आम चुनाव होने हैं। रेटिंग एजेंसी फिच ने इस महीने की शुरुआत में अनुमान लगाया था कि मोदी सरकार के 2024 में चुनाव के बाद सत्ता में दोबारा लौटने की सबसे अधिक संभावना है। शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में पीएसयू की हिस्सेदारी की बिक्री गति हाल ही में धीमी हो गई है। 2021-2022 की तुलना में 2023 में प्रमुख पीएसयू हिस्सेदारी बिक्री की संख्या कम रही है। श्रीवास्तव ने कहा, ‘विस्तारित नियामक प्रक्रियाओं, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, कुछ क्षेत्रों में निजीकरण का राजनीतिक विरोध और 2024 के आम चुनाव से पहले सरकारी प्राथमिकताओं में बदलाव सहित विभिन्न कारकों के कारण विनिवेश की प्रवृत्ति में हाल ही में गिरावट देखी गई है।’

Latest articles

जयपुर मेट्रो विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक, प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ने के निर्देश

जयपुर । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को जयपुर मेट्रो के विस्तार को लेकर एक...

नवरात्र के पहले दिन रिकॉर्ड 622 रजिस्ट्रियां, सात करोड़ की आय

भोपाल भोपाल में चैत्र नवरात्र के पहले दिन संपत्ति रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड बना है। एक...

भोपाल में नहीं दिखा ईद का चांद, आज धूमधाम से मनाई जाएगी ईद

भोपाल भोपाल में गुरुवार को ईद का चांद नजर नहीं आया, जिसके चलते अब शुक्रवार...

कटारा हिल्स में रजाई-गद्दे की दुकान खाक, दमकल की देरी से भड़का लोगों का गुस्सा

भोपाल भोपाल। राजधानी के कटारा हिल्स स्थित स्प्रिंग वैली क्षेत्र में गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात...

More like this

समय पर खर्च करें केंद्रीय निधि, ताकि विकास की गति बनी रहे: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के विकास में केंद्रीय सहायता प्राप्त योजनाओं...

मप्र में टैक्स फ्री हुई फिल्म ‘शतक’ — मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले— राष्ट्रसेवा और आत्मनिर्भर भारत का देती है संदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हिंदी फिल्म ‘शतक’ को मध्य प्रदेश में टैक्स फ्री...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में ‘राज-उन्नति’ की दूसरी बैठक — 84,282 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई...

भोपाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में ‘राज-उन्नति’ कार्यक्रम की दूसरी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित...