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चीन नहीं अब भारत में लगेंगी फैक्ट्रियां, 64 लाख लोगों को मिलेगी नौकरी, सरकार ने बनाया ठोस प्लान

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नई दिल्ली

चीन ने कोरोना महामारी के प्रकोप को रोकने के लिए सख्त लॉकडाउन लगा रखा है। इस कारण पूरी दुनिया में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। दुनिया की कई कंपनियां अब चीन का विकल्प तलाश रही हैं और भारत इस मौके को हाथोंहाथ लेना चाहता है। सरकार ने देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रॉडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव (PLI) स्कीम शुरू की थी। अब तक कई सेक्टर्स में इसे शुरू किया जा चुका है। पिछले दो साल में इसका मिलाजुला परिणाम देखने को मिला है। कई सेक्टर्स में इसका अच्छा नतीजा देखने को मिला है लेकिन कई सेक्टर्स में उम्मीद के अनुरूप नतीजे नहीं आए हैं। अब सरकार इस योजना को फास्ट-ट्रैक में डालने की तैयारी में है।

डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड, नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के टॉप अधिकारियों की पिछले हफ्ते बैठक हुई। इसमें पीएलआई योजना में निवेश की स्थिति पर चर्चा हुई। समीक्षा में यह बात सामने आई कि पिछले दो साल में कुछ सेक्टर्स में शानदार नतीजे देखने को मिले हैं जबकि कुछ सेक्टर्स में उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं रहे हैं। अब इस योजना को फास्ट ट्रैक पर डालने की तैयारी चल रही है। एक अधिकारी ने कहा कि कुछ सेक्टर्स में अच्छी प्रगति हुई है और कुछ में इसकी रफ्तार स्लो है। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि इस स्कीम में क्या सुधार किया जा सकता है। अगर परमिशन में कोई दिक्कत है तो उसे दूर किया जाएगा। साथ ही इसकी खामियों को भी दूर किया जाएगा ताकि फंड्स का दुरुपयोग रोका जा सके।

64 लाख लोगों को नौकरियां
अधिकारी ने कहा कि अब तक 14 चैंपियन सेक्टर्स में पीएलआई योजना की शुरुआत की जा चुकी है। लेकिन उनकी प्रगति कि रफ्तार अलग-अलग रही है। मार्च 2022 तक 2.34 लाख करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया जा चुका था। सबसे ज्यादा दिलचस्पी ऑटोमोबाइल एंड ऑटो कंपोनेंट्स, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरीज, स्पेशियल्टी स्टील और हाई-एफिशियंसी सोलर पैनल्स में देखने को मिल रही है। इसके अलावा ड्रोन, वाइट गुड्स, टेक्सटाइल्स, टेलिकॉम एंड नेटवर्किंग प्रॉडक्ट्स, फूड प्रॉडक्ट्स और मेडिकल डेवाइसेज में भी पीएलआई स्कीम शुरू की गई है।

इन निवेश से अगले पांच साल में 64 लाख लोगों को नौकरियां मिलने की उम्मीद है। मार्च, 2022 तक 26,000 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। साल 2020 में सबसे पहले मोबाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और फार्मास्यूटिकल्स में इस स्कीम को शुरू किया गया था। वाइट गुड्स सेक्टर में 64 कंपनियों को परमिशन मिली है। इनमें से 15 कंपनियां प्रॉडक्शन फेज में हैं जबकि बाकी 49 कंपनियां अपने निवेश को अमली जामा पहनाने की प्रक्रिया में हैं।

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