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Friday, April 17, 2026
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विदेशों में सोने के भाव मिल रहा प्याज! भारत के किसान को मिल रहा एक रुपये दाम

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नई दिल्ली

दुनियाभर में प्याज की भारी कमी हो गई है। इससे कई देशों में इसकी कीमत में काफी उछाल आई है। हालत यह हो गई है कि कई देशों में लोगों को प्याज के बिना ही गुजारा करना पड़ रहा है। इसकी शुरुआत फिलीपींस से हुई। वहां प्याज इतना महंगा हो गया है कि लोगों ने इसकी तुलना गोल्ड से करनी शुरू कर दी है। अब कई देशों में प्याज की कीमत आसमान छू रही है। तुर्की से लेकर कजाकस्तान तक प्याज की महंगाई लोगों के रुला रही है। प्याज एक तरह से ग्लोबल फूड क्राइसिस का सिंबल बन गया है। जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में स्थिति और बदतर हो सकती है। दुनियाभर में सब्जी से लेकर सलाद और करी में प्याज का भरपूर इस्तेमाल होता है। पाकिस्तान में बाढ़, सेंट्रल एशिया में पाले के प्रकोप और यूक्रेन युद्ध के कारण प्याज की कीमत बढ़ी है। दूसरी ओर भारत में किसानों को लागत के अनुरूप कीमत नहीं मिल पा रही है। किसानों को एक रुपये किलो प्याज बेचना पड़ रहा है।

फिलीपींस में प्याज की कीमत मीट से भी ज्यादा हो गई है। वहां पिछले कई महीनों से इसकी कीमत में उछाल आ रही है। सितंबर से देश में प्याज की कीमत ग्लोबल एवरेज से अधिक बनी हुई है। पिछले चार महीने में इसकी कीमत में चार गुना उछाल आई है। वहां लाल प्याज की कीमत 2,476 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। यह चिकन की कीमत से तीन गुना और बीफ से 25 फीसदी ज्यादा है। फिलीपींस में पिछले साल आए कई तूफानों के कारण फसल को भारी नुकसान पहुंचा था। वहां प्याज की जमाखोरी की भी खबरें हैं। अब सरकार ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं।

क्यों बढ़ी कीमत
प्याज केवल फिलीपींस के लोगों नहीं रुला रहा है। तुर्की, कजाकस्तान और मोरक्को में भी प्याज की कीमत आसमान छू रही है। यूरोपीय यूनियन में फसल कम होने और सूखे के कारण प्याज की कीमत में तेजी आई है। पिछले साल यूरोप के कुछ हिस्सों में सूखा पड़ा था। इसका असर नीदरलैंड पर भी पड़ा था जो दुनिया में प्याज का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है। इससे देश में प्याज की कीमत में तेजी आई। इस महीने की शुरुआत में वहां प्याज का थोक मूल्य 58 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था। मौसम की मार से भी प्याज पर असर पड़ा। उजबेकिस्तान, ताजिकिस्तान, कजाकस्तान और किर्गीजस्तान में पाले के कारण प्याज का स्टॉक बर्बाद हो गया। इन देशों ने प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगा दिया है।

प्याज की शॉर्टेज के बीच तुर्की ने भी कुछ एक्सपोर्ट रोक दिया है। देश में प्याज की कीमत तेजी से बढ़ रही है। उत्तर अफ्रीकी देश मोरक्को में बाढ़ के कारण प्याज की फसल प्रभावित हुई है। सरकार ने कई देशों के लिए इसके निर्यात पर पाबंदी लगा दी है। फिर भी प्याज की कीमत आसमान छू रही है। हालत यह हो गई है कि लोगों ने प्याज खाना ही छोड़ दिया है। कई देशों में तो प्याज दुकानों से गायब हो गया है और इसकी राशनिंक करनी पड़ रही है।

कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे की मार
पाकिस्तान में बाढ़, सेंट्रल एशिया में पाले के प्रकोप और यूक्रेन युद्ध के कारण प्याज की कीमत बढ़ी है। इसी तरह नॉर्थ अफ्रीका में किसानों को सूखे का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान में बाढ़ से प्याज की फसल प्रभावित हुई और उसे ईरान, उजबेकिस्तान और तुर्की से आयात करना पड़ रहा है। यूक्रेन में युद्ध के कारण उत्पादन पर असर पड़ा है। यूक्रेन को पोलैंड, रोमानिया, मोल्दोवा, कजाकस्तान और तुर्की से प्याज का आयात करना पड़ रहा है। युद्ध से पहले यूक्रेन इन देशों को निर्यात किया करता था।

इस बीच भारत में प्याज की कीमत में भारी कमी आई है। किसानों को एक रुपये के भाव पर प्याज बेचना पड़ रहा है। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक किसान 70 किमी का सफर कर मंडी पहुंचा। उसने 512 किलो प्याज बेची, लेकिन उसे बदले में मिला सिर्फ दो रुपये मिले। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक बरशी तालुका के बोरगांव के 58 वर्षीय किसान राजेंद्र तुकाराम चव्हाण ने बताया कि उनको प्याज के लिए एक रुपये प्रति किलो का दाम मिला। मंडी व्यापारी ने 512 रुपये की कुल रकम से 509.50 रुपये ट्रांसपोर्ट, हेड-लोडिंग और वजन शुल्क में कटौती की। इस तरह उनको केवल 2.49 पैसे ही मिले।

भारत में प्याज किसान का दर्द
चव्हाण ने कहा कि पिछले साल प्याज का भाव 20 रुपये प्रति किलो था। उन्होंने कहा कि बीज, खाद और कीटनाशकों की कीमत पिछले 3-4 सालों में दोगुनी हो गई है। इस बार केवल 500 किलो प्याज उगाने के लिए उनके लगभग 40,000 रुपये खर्च हुए थे। चव्हाण से प्याज खरीदने वाले सोलापुर एपीएमसी के व्यापारी नासिर खलीफा का कहना है कि चव्हाण के प्याज की क्वालिटी बहुत खराब थी। लासलगांव मंडी में प्याज की आवक दोगुनी हो गई है। दिसंबर में औसत थोक कीमत 1850 रुपये प्रति क्विंटल थी जो अब गिरकर 550 रुपये रह गई है।

देश से प्याज का एक्सपोर्ट पिछले दो साल स्थिर रहने के बाद इस साल बढ़ा है। खासकर पश्चिम एशिया से मांग बढ़ने के कारण इसमें तेजी आई है। इस वित्त वर्ष के दौरान अब तक 15.19 लाख टन प्याज का एक्सपोर्ट किया जा चुका है जबकि पिछले पूरे साल 15.38 लाख टन प्याज का निर्यात किया गया था। देश में होने वाले कुल प्याज का 10 से 15 फीसदी निर्यात किया जाता है। देश में सबसे ज्यादा प्याज महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में होता है। भारतीय प्याज की पश्चिम एशिया, श्रीलंका, बांग्लादेश, मलेशिया और नेपाल में बहुत मांग है।

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