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इस बार फंस गईं उर्फी! क्या पब्लिक प्लेस में कम कपड़े पहनने पर गिरफ्तारी हो सकती है, जानें क्या है कानून

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उर्फी जावेद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शुक्रवार सुबह वायरल हुआ। वीडियो में दिख रहा है कि पुलिस उर्फी जावेद को अपने साथ चलने को कहती है। उर्फी ने सवाल किया कि कस्टडी में क्यों लिया जा रहा है। जवाब आता है इतने छोटे कपड़े पहनकर कौन घूमता है। क्या सच में उर्फी को हिरासत में लिया गया या कोई नया पब्लिसिटी स्टंट? इसके बीच यह भी जानना भी जरूरी है कि क्या किसी को छोटे कपड़े पहनने के लिए अरेस्ट किया जा सकता है। ऐसे ही कुछ सवाल पिछले दिनों दिल्ली मेट्रो में माइक्रो स्कर्ट पहनकर ट्रैवल करने पर उठे थे। सोशल मीडिया पर इसको लेकर काफी बहस छिड़ी थी। इसको लेकर अलग-अलग सवाल पूछे गए?

क्या कहता है कानून इस बारे में… जहां तक अपनी पसंद के कपड़े पहनने की बात है तो इसमें कोई रोकटोक नहीं है। कानूनी जानकारों का कहना है कि कोई भी अपनी पसंद के कपड़े पहन सकता है लेकिन सार्वजनिक जगहों पर न्यूडिटी नहीं कर सकते। भारत में अश्लीलता को लेकर कानून तो है, लेकिन इसे स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया है। IPC सेक्शन 292 और IT एक्ट सेक्शन 67 में उन मटेरियल को अश्लील बताया गया है जो कामुक है, या कामुकता पैदा करता है और इसे पढ़ने, देखने और सुनने वाले को बिगाड़ दे।

इस तरह के मामलों में 2 साल की कैद और 2 हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है। हालांकि कानून में इसे सही से परिभाषित नहीं किया गया है और व्याख्या करने का अधिकार कोर्ट पर छोड़ दिया गया है। कई लोगों का कहना है कि आजादी का मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी करें। पब्लिक ट्रांसपोर्ट खासकर मेट्रो में इस प्रकार की ड्रेस पहनने पर गलत प्रभाव पड़ता है। संविधान का आर्टिकल बताकर इसको जस्टिफाई नहीं किया जा सकता।

हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट का एक फैसला आया जिसमें कोर्ट की ओर से कहा गया कि महिलाओं के छोटे कपड़ों में डांस करना या इशारे करना अश्लीलता नहीं कहा जा सकता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 5 लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। पुलिस ने एक रिजॉर्ट और वॉटर पार्क के बैंक्वेट हॉल पर रेड की थी जहां कुछ महिलाएं छोटी स्कर्ट्स में डांस कर रही थीं और कुछ लोग उन पर पैसे उड़ा रहे थे।

हाल ही में केरल हाई कोर्ट की ओर से एक फैसला सामने आया था जिसमें यह कहा गया कि प्राइवेट प्लेस पर दूसरों को दिखाए बिना अश्लील तस्वीरें और वीडियो देखना कानून के तहत अपराध नहीं है। यह व्यक्तिगत पसंद का मामला है। केरल हाई कोर्ट की ओर से कहा गया कि इस तरह के कृत्य को अपराध घोषित करना किसी व्यक्ति की निजता में दखल और निजी पसंद में हस्तक्षेप करना होगा। आईपीसी की धारा 292 के तहत दर्ज मामले को हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था। 2016 में यह शख्स को सड़क किनारे मोबाइल पर अश्लील वीडियो देखते हुए पुलिस ने पकड़ा था।

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