नई दिल्ली:
अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अपनी सफलता का राजफाश किया है। पिछले साल हिंडनबर्ग के तूफान का जिक्र कर उन्होंने वो मंत्र बता दिए हैं जिन्होंने मुश्किल समय में भी उन्हें चट्टान की तरह खड़ा रखा। गौतम अडानी ने अपने किशोरावस्था के संघर्षों के बारे में भी बताया है। उन्होंने कहा है कि हर नुकसान एक सबक सिखाता है। इससे दुखी होने के बजाय सकारात्मक तरीके से लेना चाहिए। गौतम अडानी के मुताबिक, उनकी जिंदगी में ऐसे मोड़ आए जिनकी उन्होंने कभी कल्पना तक नहीं की थी। उद्यमिता में कदम रखना भी कुछ वैसा ही था। उन्होंने जो भी कारोबार खड़े किए उनमें उम्मीद से कहीं ज्यादा मुश्किलें आईं। ये बाधाएं और रुकावटें उन्हें ज्यादा समझदार बनाती चली गईं।
अडानी ने साझा किए जिंंदगी के कई अनुभव
मायानगरी मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में गौतम अडानी ने अपनी जिंदगी के कई अनुभव साझा किए। उन्होंने शेयर बाजार का जिक्र करते कहा, ‘ट्रेडिंग एक मानसिक लड़ाई है। यह बाजार के साथ भी चलती है और खुद के साथ भी। हर नुकसान सबक सिखाता है। प्रत्येक लाभ ज्ञान देता है। यह मंत्र हमेशा मेरे साथ रहा है।’ दिग्गज कारोबारी ने बताया कि उन्होंने डायमंड बिजनेस में मुंबई में चार साल तक काम किया। मुंबई को अनोखी जगह बताते हुए वह बोले कि यह ऐसा शहर है जहां हर दिल की धड़कन गूंजती है – बड़ा सोचो, बड़ा सपना देखो। वास्तव में मुंबई ने उन्हें सिखाया कि क्या आकांक्षाएं रखनी हैं।
कई उतार-चढ़ाव देखे
गौतम अडानी ने कहा कि इसके बाद जब वह 19 साल के होने वाले थे और मुंबई में बसने की सोच रहे थे तो जिंदगी में एक अप्रत्याशित मोड़ आया। वह बोले, ‘मेरे बड़े भाई ने एक छोटे पैमाने की पीवीसी फिल्म फैक्ट्री चलाने में सहायता करने के लिए मुझे वापस बुलाया। इस फैक्ट्री को उन्होंने अहमदाबाद के पास खरीदा था। भारी आयात प्रतिबंधों के कारण कच्चे माल की कमी के कारण व्यवसाय चुनौतीपूर्ण था। इस चुनौती ने मेरे अगले बड़े सबक के लिए आधार तैयार किया।’ अडानी बोले कि वह लाइसेंस राज का दौर था। जब छोटे पैमाने के उद्योगों को काफी संघर्ष करना पड़ता था। सरकार का नियंत्रण बहुत ज्यादा होता था। यह कारोबार करना मुश्किल बनाता था।
हर कारोबार खड़ा करने में आई मुश्किल
गौतम अडानी ने बताया कि उन्होंने किशोरावस्था में उद्यमिता का सफर शुरू किया था। उद्यमिता जोखिम लेने और कभी गंवाने, कभी गिरने के साथ स्थितियों के साथ ओके रहने का नाम है। वह बोले, ‘मुझे गिरने का कभी डर नहीं था। सभी सफलता अपनी चुनौतियों के साथ आती हैं। इसी तरह हर गिरावट अपने साथ दर्द लाती है। लेकिन हर बढ़त अपने साथ फायदा लाती है। इस लाभ को लचीलापन कहा जाता है।’ गौतम अडानी के अनुसार, उन्होंने जो भी व्यवसाय खड़े किए हैं वह उनकी अपेक्षा से कहीं ज्यादा मुश्किल थे। पिछले कुछ सालों में वह ज्यादा समझदार हुए हैं। उन्होंने जटिलता को बेहतर ढंग से स्वीकार करना शुरू कर दिया है।
