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राजस्थान में अबकी बार किसकी बनेगी सरकार, गहलोत या वसुंधरा, कौन करेगा राज?

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राजस्थान की राजनीति में आजादी के बाद के तीन दशकों तक कांग्रेस का दबदबा रहा। कांग्रेस के मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने सफलतापूर्वक 17 वर्षों तक (1954 तो 1971) सूबे में सरकार चलायी। बाद में 1977 में तत्कालीन जनसंघ के भैरोंसिंह शेखावत प्रदेश के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। 1989 में भाजपा की किसी राज्य में पहली बार सरकार आयी तो वह प्रदेश राजस्थान ही था, जब भैरोंसिंह शेखावत एक बार फिर मुख्यमंत्री बने और अगले 8 वर्षों तक उनका प्रदेश की राजनीति में दबदबा रहा। अभी पिछले दो दशकों से राजस्थान में कांग्रेस के सीनियर नेता अशोक गहलोत और भाजपा की नेता वसुंधरा राजे के बीच हर विधानसभा चुनावों में सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री रहे चुके हैं तो वसुंधरा दो बार मुख्यमंत्री रही है और आगामी विधानसभा चुनावों में तीसरी बार प्रदेश की कमान हासिल करने की जीतोड़ कोशिश में लगी हैं। साथ ही इस बार मुख्यमंत्री पद की रेस में कांग्रेस के युवा नेता सचिन पायलट भी शामिल हैं। इन्होंने वर्ष 2020 में अपनी ही प्रदेश सरकार के खिलाफ बगावत कर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी थी। लेकिन वर्तमान में विधानसभा चुनाव से पहले पायलट और गहलोत के बीच सुलह हो गई है। तो क्या इन दोनों नेताओं के बीच सुलह होने से कांग्रेस सत्ता में वापस कर पाएगी। आइए जानते हैं। राजस्थान में अबकी बार बनेगी किसकी सरकार। आइए जानते हैं

शनि में चंद्र की कठिन दशा में पायलट को हो सकता है नुकसान
राजस्थान से कांग्रेस के युवा चेहरा के रूप में सचिन पायलट को जाना जाता है। इनका जन्म 7 सितंबर 1977 को सुबह 5 बजकर 28 मिनट पर सहारनपुर उत्तर प्रदेश में हुआ था। सिंह लग्न की इनकी कुंडली में नवम भाव का स्वामी मंगल लाभ के स्थान एकादश भाव में पंचमेश गुरु तथा द्वादशेश चंद्रमा के साथ मिलकर बेहद शुभ योग बना रहा है। इस योग के कारण इनको विरासत में राजनीतिक पद प्रतिष्ठा की प्राप्ति हुई। पायलट की कुंडली के एकादश भाव में गुरु, मंगल और चंद्रमा का राजयोग बन रहा है जिसके प्रभाव से वर्ष 2004 में मात्र 26 वर्ष की आयु में वह लोकसभा सांसद बने और बाद में जल्द ही मनमोहन सरकार में राज्य मंत्री भी बने। दिसंबर 2018 में शनि में शुक्र की परिवर्तनकारी दशा में सचिन पायलट राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे और विधानसभा चुनाव जीताने में इन्होंने बड़ी भूमिका निभाई। लेकिन इनकी कुंडली में बारहवें घर में बैठे शनि-शुक्र की वजह से इन्हें मुख्यमंत्री पद से वंचित रहना पड़ गया। वर्तमान में इनकी शनि में चंद्रमा की कठिन विंशोत्तरी दशा चल रही जो इनके चुनाव प्रचार के लिए शुभ नहीं है। शनि हानि स्थान यानी बाहरवें घर में है तथा अर्तदशानाथ चंद्रमा महादशा नाथ शनि से बाहरवें घर में है तथा नवांश में नीच राशि में है। सचिन पायलट अपने अधिक समर्थकों को विधानसभा के लिए टिकट नहीं दिला पाएंगे जिससे उनकी स्थिति प्रदेश में कमज़ोर होती दिख रही है। ऐसे में इनको अबकी बार भी राजस्थान में मुंख्यमंत्री पद मिलना मुश्किल दिख रहा है।

अशोक गहलोत की कुंडली का ‘पाप कर्तरी’ योग बन रहा बाधक
राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जन्म 3 मई 1951 को सुबह 9 बजकर 50 मिनट पर जोधपुर में हुआ है और इनकी कुंडली के अनुसार इनका जन्म लग्न मिथुन बनता है। अशोक गहलोत की कुंडली में राज-सत्ता के स्थान दशम भाव में गुरु-चंद्र का शुभ गजकेसरी योग बन रहा है। कुंडली के लाभ स्थान यानी ग्यारहवें भाव में बन रहे मंगल, सूर्य और बुध के योग ने उनको तीसरी बार मुख्यमंत्री का पद दिया जब वह मंगल-सूर्य की शुभ दशा में दिसंबर 2018 में चल रहे थे। वर्तमान में वह नवम भाव में बैठे राहु की दशा में दशम भाव में बैठे गुरु की अंतर्दशा में चल रहे हैं किंतु गुरु उनकी कुंडली में ‘गजकेसरी’ योग में होने के साथ-साथ दोनों ओर से पाप ग्रहों से घिरा होने के चलते एक अशुभ ‘पाप कर्तरी’ योग में फंस गया है जिसके कारण वह अपनी पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं का पूर्ण सहयोग न मिलने के चलते खुद को चुनाव प्रचार में कई बार बंधा हुआ महसूस कर सकते हैं। अशोक गहलोत की कुंडली में दशम में बैठे गुरु की पिछली राशि में राहु तथा अगली राशि में पाप ग्रहों सूर्य और मंगल का होना उनके लिए बाधक योग बना है। नवमांश कुंडली में गुरु अष्टम भाव में होकर अशुभ स्थिति में है, ऐसे में राजस्थान चुनाव में इनका प्रदर्शन संतोषजनक रह सकता है लेकिन यह अपनी पार्टी को जीत दिला पाएं यह मुश्किल दिख रहा है।

वसुंधरा राजे का ‘नीच भंग’ राजयोग दिला सकता है सत्ता सुख
8 मार्च 1953 को शाम 4 बजकर 45 मिनट पर मुंबई महाराष्ट्र में जन्मीं वसुंधरा राजे ग्वालियर के प्रसिद्ध सिंधिया राजघराने से संबंध रखती हैं। कर्क लग्न की इनकी कुंडली में पद प्राप्ति के स्थान यानी सप्तम भाव के स्वामी शनि अपनी उच्च राशि तुला में होकर सिंहासन के स्थान यानी चतुर्थ भाव में हैं। शनि को राज सत्ता के स्थान दशम भाव से नवमेश गुरु तथा चतुर्थेश शुक्र देख रहे हैं। जिससे एक प्रबल राजयोग बना रहा है। इसके साथ ही इनकी कुंडली में नवमेश गुरु का दशम में होना और दशमेश मंगल का नवम भाव में होना यानी गुरु और मंगल का राशि परिवर्तन योग होने से ‘धर्म -कर्म अधिपति’ राज योग बन रहा है जिसने इन्हें दो बार प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया और अब तीसरी बार भी इस पद का प्रबल दावेदार बना रहा है। लेकिन इनकी पार्टी बीजेपी ने यह विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लड़ने की घोषणा की है। लेकिन वसुंधरा राजे की कर्क लग्न की कुंडली में चल रही राहु में बुध की विंशोत्तरी दशा इनको सभी प्रतिकूल परिस्थितयों में विजय दिलाने का ज्योतिषीय आश्वासन दे रही है। बुध कर्क लग्न की इनकी कुंडली में तीसरे और बाहरवें घर का स्वामी होने से अकारक ग्रह है, किंतु नीच का होकर बुध भाग्य स्थान यानी नवम भाव में बैठा है और दशम भाव के स्वामी मंगल से युत भी है। बुध का राशिपति गुरु दशम भाव में होने से शानदार ‘नीच भंग राजयोग’ वसुंधरा राजे को तीसरी बार राजस्थान का ‘राज’ दिला सकता है। महादशा नाथ राहु से अंतर्दशा नाथ बुध का पराक्रम के स्थान तीसरे घर में होना तथा बुध का नवांश में अपनी राशि कन्या में होना उनके लिए एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

(सचिन मल्होत्रा, ज्योतिषशास्त्री
sachin.keepsmiling@gmail.com)

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