मुंबई
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के काफिले के बीच में एक एंबुलेंस के रुकने को लेकर लगे आरोपों पर मुंबई ट्रैफिक पुलिस की सफाई सामने आई है। मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने बुधवार को उन आरोपों को खारिज कर दिया कि केंद्रीय गृह मंत्री के काफिले के गुजरने के दौरान एक एंबुलेंस को रोका गया था। अमित शाह ने शहर के दो दिवसीय दौरे के दौरान सोमवार को एक प्रमुख गणेश पंडाल लालबागचा राजा का दौरा किया था। वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आवास पर भी गए थे।
पुलिस ने कहा कि एंबुलेंस में कोई आपात स्थिति वाला रोगी नहीं था और तकनीकी खराबी के कारण उसका सायरन बजता रहा। शाह की महाराष्ट्र यात्रा के एक दिन बाद इसके वीडियो और तस्वीरें सामने आईं, जिसमें शाह के काफिले के गुजरने के दौरान उपनगर अंधेरी में यातायात में एंबुलेंस इंतजार करती दिख रही है।
सायरन खराब होने की वजह से बजता रहा
यातायात पुलिस ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर जारी एक बयान में कहा, ‘पूछताछ के बाद मौके पर मौजूद यातायात अधिकारी ने यह पुष्टि की कि एंबुलेंस में कोई आपातकालीन रोगी नहीं था और खराबी के कारण एंबुलेंस चालक सायरन को बंद करने में असमर्थ था। आरोप झूठे हैं।’ वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद कई यूजर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वीआईपी संस्कृति की आलोचना की।
सड़कों को बंद करने पर सवाल
साकेत गोखले ने ट्वीट किया, ‘मुंबई में आपने पहले कभी इसकी कल्पना नहीं की होगी, अमित शाह के काफिले को जाने देने के लिए एक एंबुलेंस को इंतजार कराया गया। अमित शाह को तकनीकी रूप से जेड प्लस सुरक्षा (एक वीआईपी और वीवीआईपी नहीं) मिली है। फिर भी पहली बार सड़कें बंद थीं… क्योंकि भाजपा अब सत्ता में है।’
एंबुलेंस तो हमेशा आपात स्थिति में होती है
यातायात पुलिस के स्पष्टीकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए, अभिजीत पडोले ने ट्वीट किया, ‘एंबुलेंस हमेशा आपात स्थिति में होती है… कोई आपातकालीन रोगी नहीं था, इससे आपका क्या मतलब है? अगर एंबुलेंस में कोई मरीज है तो यह एक आपात स्थिति है। यदि कोई मरीज नहीं है तो इसका मतलब है कि एंबुलेंस किसी रोगी को लेने जा रही है। अपनी खामियों को छिपाना बंद करें।’
