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पाकिस्‍तान का आतंकी साजिद मीर जो मरकर ‘जिंदा’ हो गया, मुंबई हमले के ‘प्रोजेक्ट मैनेजर’ को अब बचा रहा चीन

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कराची

साजिद माजिद मीर या साजिद मीर, पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठन लश्‍कर-ए-तैयबा का वह टेररिस्‍ट जो एक बार फिर खबरों में आ गया है। पाकिस्‍तान के हितैषी चीन ने इस शख्‍स को ग्‍लोबल आतंकी घोषित करने वाला प्रस्‍ताव ब्‍लॉक कर दिया है। मीर वह आतंकी है जिसकी वजह से कसाब और उसके साथियों ने 26 नवंबर 2008 में मुंबई को एक के बाद एक हमलों से दहला दिया था। मीर इन आतंकियों का हैंडलर था। कभी इस आतंकी को पाकिस्‍तान ने मरा हुआ घोषित कर दिया था। लेकिन जब एफएटीएफ की ग्रे लिस्‍ट से बाहर आने पर फिर से खतरा मंडराया तो इसे 15 साल की जेल की कैद की खबर दुनिया को दे दी। साजिद काफी रहस्‍यमय इंसान है और कहते हैं कि इसे सिर्फ कुछ ही लोगों ने देखा है।

फिर से जिंदा हुआ मीर
पाकिस्‍तान के लाहौर में जन्‍में साजिद मीर के बारे में कुछ साल पहले सरकार ने कहा था कि उसकी मौत हो गई है। उसका कुछ पता नहीं चल पा रहा है। लेकिन जब जून में उसे 15 साल की सजा सुनाई गई तो हर कोई चौंक गया। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक एफएटीएफ की ग्रे लिस्‍ट का कमाल है जो साजिद फिर से जिंदा हो गया है। यह बिल्‍कुल उसी तरह था जिस तरह से एक बार पाकिस्‍तान के पूर्व राष्‍ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने अल कायदा सरगना लादेन के लिए बयान दिया था।

मुशर्रफ ने कहा था कि लादेन अब मर चुका है और शायद पाकिस्‍तान में नहीं हैं। एफबीआई के मुताबिक पांच लाख डॉलर के ईनाम वाला साजिद मुंबई हमलों का ‘प्रोजेक्‍ट मैनेजर’ था। साल 2005 में एक फेक पासपोर्ट और झूठे नाम के साथ साजिद एक क्रिकेट मैच देखने के लिए भारत आया था। मीर के बारे में ज्‍यादा जानकारी नहीं है और न ही उसे बहुत से लोगों ने देखा है। अगर कोई साजिद के बारे में जानता है तो वह बस पाकिस्‍तान है। लेकिन पाकिस्‍तान ने हर बार उसकी जानकारी देने से इनकार कर देता था।

लादेन से भी ज्‍यादा खतरनाक
अमेरिकी विदेश विभाग की तरफ से कहा गया है कि मीर ने 2008 के हमलों की योजना बनाई, उनकी तैयारी की और उसे अंजाम तक पहुंचाया। अमेरिका ने अप्रैल 2011 में मीर को मुंबई हमलों में दोषी ठहराया था। इसके बाद अगस्‍त 2012 में अमेरिका के वित्‍त मंत्रालय की तरफ से मीर को स्‍पेशली डेजिग्‍नेटेड ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित किया गया था।

एफबीआई की मानें तो मीर पाकिस्‍तान में ही है। इस साल जून में जब उसे सजा सुनाई गई तो पाक की तरफ से जानकारी आई कि वह कोट लखपत जेल में बंद है। लश्‍कर का यह आतंकी हमले के बाद सऊदी अरब, बांग्‍लादेश और दुबई गया था। यह आतंकी इतना ज्‍यादा खतरनाक है कि यह यूके, भारत, अमेरिका, फ्रांस और सभी खाड़ी देशों में मौजूद आतंकियों से कनेक्‍टेड है। ये सभी आतंकी 26/11 जैसे हमलों को अंजाम देने में सक्षम हैं।

छिपाने की हजार कोशिशें
पाकिस्‍तान ने इस आतंकी को छिपाने के लिए इतनी कोशिशें की हैं कि इसकी कई फेक आईडीज तक मौजूद हैं। पाकिस्‍तान ने तो यहां तक दावा किया था कि साजिद मीर एक मौलवी है और उसका मुंबई हमलों से कोई लेना-देना नहीं है। फ्रांस के सबसे ताकतवर इनवेस्टिग‍ेटिव जज जीन-लुई ब्रुगुएरे और इनवेस्टिगेशन जर्नलिस्‍ट सबेस्चियन रोटेला ने कहा है कि मीर कोई काल्पनिक इंसान नहीं है बल्कि हकीकत में है। फ्रांस के एक लश्‍कर आतंकी ने बताया कि मीर आईएसआई एजेंट भी है।

उम्र पर भी कनफ्यूजन
मीर की उम्र 40 साल बताई जाती है और कहा जाता है कि सन् 1990 के दशक में उसने लश्‍कर ज्‍वॉइन किया था। एफबीआई की मानें तो मीर ने ही डेनमार्क के अखबार जीलैंड्स-पोस्टेन पर हमला किया था। यह हमला साल 2008 और 2009 के बीच हुआ था और इसमें अखबार के कर्मियों को भी निशाना बनाया गया था। 22 अप्रैल 2011 को एफबीआई ने उसके खिलाफ अरेस्‍ट वॉरेंट जारी किया था। अमेरिकी एजेंसी ने माना था कि मीर पिछले साल तक पाकिस्‍तान में ही था।

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