नई दिल्ली,
चीन में तख्तापलट को लेकर उड़ रही अफवाहों के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो बीजिंग के एक एग्जीबिशन की बताई जा रही है. दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो मंगलवार का है. उज्बेकिस्तान में एससीओ मीटिंग से वापस लौटने के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार सार्वजनिक तौर पर नजर आए हैं.
दरअसल, समरकंद में एससीओ मीटिंग से लौटे शी जिनपिंग किसी भी सार्वजनिक मंच पर नजर नहीं आए थे, जिसके बाद सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर शुरू हो गया था. अफवाह थी कि चीन में सेना ने तख्तापलट कर दिया है. कई लोग तो यह भी दावा कर रहे थे कि शी जिनपिंग को पार्टी के प्रमुख पद से हटा दिया गया है. वहीं अफवाह यह भी थी कि 16 अक्टूबर से शी जिनपिंग अपना तीसरा कार्यकाल शुरू नहीं कर पाएंगे और उनकी जगह किसी दूसरे को राष्ट्रपति की कुर्सी पर विराजमान किया जा सकता है.
वीडियो में दिख रहे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
वीडियो में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और कई अधिकारी नजर आ रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि वीडियो को बीजिंग की एक एग्जीबिशन में शूट किया गया है. वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. जाहिर है कि वीडियो में चीनी राष्ट्रपति के दिखने से सभी तरह की अफवाहों पर विराम लग जाएगा.
तो क्या क्वांरटीन थे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
दरअसल, जब चीन में तख्तापलट की अफवाह जोरों पर थी, उस समय कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा था कि समरकंद से लौटने के बाद से ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग क्वारंटीन हो गए हैं, क्योंकि चीन में विदेश से आने वालों के लिए सख्त कोविड नियम हैं और जो भी बाहर देश से चीन आता है तो उसे गाइडलाइंस के तहत कुछ दिनों तक क्वारंटीन रहना पड़ता है. हालांकि, चीन के राष्ट्रपति क्वारंटीन थे या नहीं, इस बारे में भी अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. चीन की सरकारी मीडिया शुरुआत से ही इस मामले में पूरी तरह चुप्पी साधे हुए थी.
कब शुरू हुई थी अफवाह
चीन के राष्ट्रपति को लेकर अफवाह की शुरुआत उस समय हुई, जब एक चीनी पत्रकार झाओ लांजियन चीन से भागकर अमेरिका पहुंचा और ट्विटर के जरिए कहा कि चीन में अचानक उड़ानों को रद्द कर दिया गया है. पत्रकार के इस दावे को चीनी आध्यात्मिक मूवमेंट फाल्गुन गोंग समर्थित मीडिया ने उठाना शुरू किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इन अफवाहों ने जोर पकड़ लिया.
इसी बीच समरकंद से लौटने के बाद चीनी राष्ट्रपति कहीं भी सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए तो अफवाहों को और ज्यादा बल मिल गया. इसके बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जाने लगे. काफी लोगों ने एक वीडियो भी ट्विटर पर शेयर किया, जिसमें काफी संख्या में मिलिट्री ट्रक एक सड़क पर चलते हुए नजर आ रहे थे.
वीडियो को लेकर कहा गया कि यह सब सैन्य ट्रक बीजिंग भेजे जा रहे हैं. ऐसे में आशंका जताई गई कि बीजिंग में कुछ बड़ा होने जा रहा है, जिसकी वजह से काफी संख्या में सेना के जवानों को तैनात किया जा रहा है.
हालांकि, जर्मन न्यूजपेपर के एक रिपोर्टर ने बीजिंग पहुंचकर सोशल मीडिया पर चल रहे कई दावों को गलत ठहराया. उन्होंने कहा कि वे जान को जोखिम में डालते हुए बीजिंग की कई जगहों पर गए हैं और वहां के ताजा हालात दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. उनके अनुसार, बीजिंग के सभी सरकारी कार्यालयों में कोई खास चहल-पहल नहीं नजर आई है और एकदम सामान्य लग रहा है.
