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यूक्रेन से लेकर वैक्सीन तक…UN में दिखा भारत का जलवा, जल-भुन उठा पाकिस्तान

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वॉशिंगटन

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा की बैठक में इस साल भारत प्रमुखता से छाया रहा। आलम यह रहा कि 12 देशों के नेताओं ने भारत के नाम का जिक्र किया। इनमें कई देशों ने भारत के कोरोना वैक्‍सीन के दान की जमकर तारीफ की, जबकि कई ऐसे भी थे जिन्‍होंने भारत की भूमिका की प्रशंसा की। वहीं पाकिस्‍तान और तुर्की जैसे भारत के धुर विरोधी देशों ने कश्‍मीर की रट भी लगाई। भारत को लेकर सबसे ज्‍यादा चर्चा यूक्रेन युद्ध को लेकर पीएम मोदी के समरकंद में दिए बयान की थी। इसमें पीएम मोदी ने रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन को जंग को रोकने की सलाह दी थी। फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुअल मैक्रां ने पीएम मोदी के इस बयान का संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में दिए अपने भाषण में जिक्र भी किया।

फ्रांस के राष्‍ट्रपति ने कहा, ‘जैसाकि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक कहा है कि आज का दौर युद्ध का नहीं है।’ पीएम मोदी के इस बयान को पश्चिमी देशों में जमकर सराहा जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि फरवरी में यूक्रेन युद्ध शुरू होने से लेकर अब तक दुनिया के किसी भी राष्‍ट्राध्‍यक्ष ने रूसी राष्‍ट्रपति पुतिन के सामने बैठकर इस तरह की सीधी टिप्‍पणी नहीं की है। दो प्रमुख पश्चिमी देशों ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज ट्रस और जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्‍चोल्‍ज ने भारत के साथ रिश्‍तों का अपने भाषण में उल्‍लेख किया।

भारत- ब्रिटेन फ्री ट्रेड समझौते को लेकर बातचीत कर रहे
ब्रितानी पीएम ट्रस ने कहा कि उनका देश अन्‍य लोकतांत्रिक देशों जैसे भारत, इजरायल, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका के साथ रिश्‍ते मजबूत कर रहा है। भारत और ब्रिटेन इस समय फ्री ट्रेड समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं। वहीं ब्रिटेन अब हिंद प्रशांत क्षेत्र पर अपना फोकस किए हुए है। इस ट्रेड डील के बाद भारत के साथ ब्रिटेन का रिश्‍ता एक कदम और आगे बढ़ जाएगा। जर्मनी के चांसलर ओलाफ ने कहा कि उनकी सरकार भारत के साथ संपर्क में है। इससे पहले जर्मनी ने भारत को जी7 देशों की बैठक में आमंत्रित किया था। महत्‍वपूर्ण बात यह है कि पीएम मोदी इस साल दो बार जर्मनी की यात्रा पर गए हैं।

उधर, संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की स्‍थायी सदस्‍यता दिए जाने की मांग पर भारत को पुर्तगाल, रूस और यूक्रेन जैसे देशों का साथ मिला। पुर्तगाल के पीएम अंटोनियो कोस्‍टा ने कहा कि सुरक्षा परिषद में अफ्रीकी महाद्वीप, ब्राजील और भारत को स्‍थायी सदस्‍यता दी जाए। इसके अलावा छोटे देशों को भी निष्‍पक्षता के साथ शामिल किया जाए। रोचक बात यह है कि पुर्तगाली पीएम भारतीय मूल के हैं और उनके पिता गोवा के रहने वाले थे। पीएम कोस्‍टा कई बार भारत की यात्रा पर आ चुके हैं। उन्‍होंने अपनी भारत यात्रा के दौरान पीएम मोदी से मुलाकात भी की थी।

भारत और ब्राजील स्‍थायी सदस्‍यता के योग्‍य: रूस
यूक्रेन राष्‍ट्रपति एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्‍होंने ऑनलाइन इस सभा को संबोधित किया और मांग की कि सुरक्षा परिषद में सुधार किया जाए। उन्‍होंने भारत को सदस्‍य बनाए जाने का जिक्र किया। वहीं रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी भारत के सुरक्षा परिषद की स्‍थायी सदस्‍यता के दावे का समर्थन किया। उन्‍होंने कहा कि भारत और ब्राजील स्‍थायी सदस्‍यता के योग्‍य हैं। वेनेजुएला ने एकध्रुवीय विश्‍व की आलोचना की और ‘उत्‍तर’ के देशों से कहा कि वे इस वास्‍तविकता को स्‍वीकार करें कि चीन, रूस, भारत, ईरान और तुर्की नई ताकत बनकर उभरे हैं। अमेरिका के राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने भी भारत की सदस्‍यता का समर्थन किया।

इस बीच भूटान और नेपाल ने भारत की कोरोना वैक्‍सीन कूटनीति के लिए धन्‍यवाद दिया। उन्‍होंने कहा कि आज हमारी 90 फीसदी आबादी को कोरोना का टीका लगा है जिसका श्रेय भारत को भी जाता है। भूटान उन देशों में शामिल था जिसे भारत ने कोरोना वैक्‍सीन की खेप सबसे पहले भेजी थी। नेपाल के विदेश सचिव भारत राज पौडयाल ने भी भारत की वैक्‍सीन मैत्री योजना की प्रशंसा की। गुयाना के राष्‍ट्रपति ने भारत के चावल के निर्यात पर रोक से होने वाली दिक्‍कतों का जिक्र किया।

पाकिस्‍तान और तुर्की ने छेड़ा कश्‍मीर राग, भारत का व‍िरोध
वहीं तुर्की और पाकिस्‍तान ने अनुमान के मुताबिक कश्‍मीर का मुद्दा महासभा में उठाया। शहबाज शरीफ ने कश्‍मीर का नाम अपने भाषण में 12 से ज्‍यादा बार लिया। इन दोनों ही देशों को भारत ने करारा जवाब दिया। इस बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा है कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के किसी ऐसे विस्तार का विरोध करता है जिसमें भारत शामिल है। द न्यूज ने बिलावल के हवाले से वाशिंगटन में पाकिस्तान दूतावास में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र मिशन और उनके सहयोगियों ने इस तरह के प्रयासों को बार-बार विफल करने के लिए काम किया है।’

पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार की संभावना है, लेकिन सुरक्षा परिषद की सदस्यता का विस्तार करना सही सुधार नहीं होगा। बिलावल ने यह भी कहा कि जलवायु संकट एक ऐसा मुद्दा होगा, जहां पाकिस्तान भारत और अन्य देशों के साथ काम करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि 10 जलवायु तनावग्रस्त देशों को विकसित देशों पर ग्रीन फाइनेंसिंग मैकेनिज्म के लिए दबाव बनाने के लिए एक आवाज बननी चाहिए। इस उद्देश्य के लिए एक क्षेत्रीय ब्लॉक बनाने के बारे में एक सवाल के जवाब में, विदेश मंत्री ने कहा: ‘मैंने पहले ही चेतावनी दे दी है। मुख्यत: यह सही है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर हमें साथ मिलकर काम करना चाहिए। जब मैं अमेरिका और चीन से इस पर मिलकर काम करने का आग्रह करता हूं, तो मेरे पास यह स्वीकार करने की नैतिक शक्ति होनी चाहिए कि चाहे जो भी मतभेद हों, भारत और पाकिस्तान को इस विषय पर भी मिलकर काम करना चाहिए।’

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