नई दिल्ली
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत ( ने कहा है कि देश में एक बार फिर बड़ा आंदोलन होगा। उनके मुताबिक, ज़मीनों की लूट मची है जैसे लखनऊ का एयर पोर्ट है उसकी पूरी ज़मीन अडानी को फ्री दे दी गई है। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष ने जो आरोप लगाया है क्या सच में वैसा है? क्या सच में लखनऊ एयरपोर्ट की पूरी जमीन अडानी को फ्री में दी गई है या बात कुछ और है। आज के फैक्ट चेक में हम राकेश टिकैट के इसी आरोप को देखेंगे की लखनऊ एयरपोर्ट की जमीन अडानी को फ्री में दी गई है या नहीं। ये पूरा मामला क्या है।
सरकार ने 6 हवाई अड्डों का निजीकरण किया था
मोदी सरकार ने फरवरी 2019 में 6 हवाई अड्डों का निजीकरण किया था। इनमें लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, मेंगलुरू, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी शामिल थे। कंप्टीटिव बिडिंग प्रोसेस में अडाणी एंटरप्राइजेज ने इन सभी का अधिकार जीता था। केंद्र सरकार और अडाणी ग्रुप के बीच हुए एमओयू करार में सेवा क्षेत्र के प्रावधानों का जिक्र किया गया है। इसमें कस्टम्स, एमिग्रेशन, स्वास्थ्य, एमईटी और सिक्योरिटी का जिम्मा एएआई के पास होगा। इसके अलावा एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अलग से सीएनएस-एटीएम सेवाओं को लेकर अडाणी ग्रुप से करार किया है। इन तीनों एयरपोर्ट की देखभाल अडाणी ग्रुप पीपीपी मॉडल के तहत करेगी।
ये एयरपोर्ट भी हैं अडाणी के जिम्मे
लखनऊ एयरपोर्ट इकलौता नहीं है, जिसे अडाणी ग्रुप ने टेक ओवर किया है, बल्कि मेंगलुरू और अहमदाबाद का हवाई अड्डा भी अडाणी ग्रुप को मिल गया है। मेंगलुरू एयरपोर्ट का संचालन अडाणी ग्रुप के हाथ आ चुका है। इसके लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अडाणी ग्रुप की तीन कंपनियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।
क्या फ्री में दी गई जमीन?
लखनऊ एयरपोर्ट का जिम्मा 2 नवंबर 2020 से अडाणी ग्रुप को मिल चुका है। अब वहां पर लगो बोर्ड पर भी अडाणी ग्रुप का नाम लिखा आ रहा है। केंद्र सरकार और अडाणी ग्रुप के बीच हुए करार के मुताबिक 2 नवंबर 2020 से अगले 50 सालों तक लखनऊ के चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट की देखरेख का काम अडाणी ग्रुप करेगा। ये जमीन 50 सालों के देखरेख के लिए अडानी ग्रुप को दी गई है। ऐसे में अडानी को फ्री में जमीन दिए जाने की बात गलत है। फैक्ट चेक में भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत का ये बयान गलत साबित हुआ है।
