नई दिल्ली,
भारत सरकार जल्द ही देश में नया श्रम कानून लागू करने वाली है. केंद्र सरकार नौकरीपेशा लोगों की वर्किंग लाइफ में कई बड़े बदलाव करने जा रही है. कर्मचारियों को एक सप्ताह में केवल 48 घंटे काम करना होगा. अगर शिफ्ट 15 मिनट से ऊपर होती है तो कंपनी उसे ओवरटाइम में काउंट करेगी और इसके अलग पैसे देगी. नए लेबर कोड में महिलाओं की नाइट शिफ्ट से लेकर लंबी छुट्टी के प्रावधान को भी बदला जाएगा. वहीं, चार दिन वर्किंग और तीन दिन की छुट्टी का प्रावधान भी शामिल है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि फ्लेक्सिबल वर्क प्लेसेज और फ्लेक्सिबल वर्किंग घंटे भविष्य की जरूरत हैं. अब श्रम मंत्रालय ने नए श्रम कानूनों पर काम करना शुरू कर दिया है. नए श्रम कानून को असर देश के लगभग 50 करोड़ कामगारों पर पड़ेगा, जो चीन के बाद सबसे बड़ी संख्या है. लेबर कोड के मुताबिक देश में 41.19 प्रतिशत लोग कृषि अद्योग, 32.33 प्रतिशत सेवा क्षेत्र और 26.18 प्रतिशत लोग अद्योग क्षेत्र में काम कर रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 31 से ज्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इसे स्वीकार कर लिया है. ज्यादातर ने नियम भी बना लिए हैं. वहीं कुछ राज्य नए लेबर कोड के कुछ पॉइंट्स पर आपत्ति जता रहे हैं. हालांकि, श्रम मंत्रालय ने फिलहाल नया लेबर कोड लागू करने की तारीख तय नहीं की है. नए लेबर कोड से कितनी बदल जाएगी वर्किंग लाइफ? आइए जानें.
4 डे वर्किंग और 15 मिनट पर ओवरटाइम
नए लेबर कोड में चार दिन काम और तीन दिन आराम यानी छुट्टी की बात कही जा रही है. इस बदलाब पर सबसे ज्यादा चर्चा है, इस नए श्रम कानून के लागू होने पर कर्मचारियों को एक सप्ताह में तीन दिन की छुट्टी मिलेगी लेकिन कर्मचारियों की शिफ्ट 12 घंटे की हो जाएगी. एक सप्ताह में 48 घंटे काम करना होगा. इस दौरान दो बार आधे घंटे की छुट्टी भी मिलेगी.
लंबी छुट्टी का प्रावधान
अगर किसी कर्मचारी को लंबी छुट्टी लेनी है तो उसे साल में कम से कम 240 दिन काम करना जरूरी है. लेकिन नए लेबर कोड में इसे घटाकर 180 दिन करने की बात कही जा रही है. यानी कर्मचारियों को अच्छी खासी लंबी छुट्टी मिल सकेगी.
महिलाओं की नाइट शिफ्ट
अगर किसी महिला कर्मचारी की नाइट शिफ्ट लगाई जाती है तो उस महिला कर्मचारी की सहमति जरूरी होगी. कंपनी अपनी इच्छा या जबरन महिला कर्मचारी की नाइट शिफ्ट नहीं लगा सकेगी.
बढ़ेगा PF कंट्रीब्यूशन
केंद्र सरकार ने नए श्रम कानून के ड्राफ्ट में कर्मचारी की बेसिक सैलरी उसकी कुल सैलरी का 50 फीसदी या उससे ज्यादा प्रावधान रखा है. बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ और ग्रेच्युटी के लिए कटने वाला पैसा भी बढ़ जाएगा. सरकार ने रिटायरमेंट के बाद भविष्य को आर्थिक रूप से मजबूद करने के लिए यह ड्राफ्ट तैयार किया है लेकिन इससे वर्तमान में मिलने वाली इन हैंड सैलरी कम हो जाएगी.
एक साल पर मिलेगी ग्रेच्युटी
कानून लागू होने पर किसी कंपनी में एक साल काम करने वाला कर्मचारी भी ग्रेच्युटी का पैसा पाने का हकदार माना जाएगा. फिलहाल यह सुविधा केवल 5 साल काम करने वाले को ही मिलती है.
