लखनऊ/इटावा
देश के सबसे बड़े सियासी अखाड़े उत्तर प्रदेश की राजनीति के पहलवान मुलायम सिंह यादव का सोमवार को निधन हो गया। उन्होंने 82 साल की उम्र में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में आखिरी सांस ली। उनके बेटे और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के ऑफिस की तरफ से जारी बयान के मुताबिक इटावा जिले के पैतृक गांव सैफई में ही मुलायम का अंतिम संस्कार किया जाएगा। मेदांता अस्पताल से उनका शव दिल्ली के अशोका रोड स्थित बंगले की तरफ ले जाया जाएगा। यहां से एक्सप्रेसवे के रास्ते पार्थिव शरीर सैफई पहुंचेगा, जहां मंगलवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा।
22 नवंबर 1939 को इटावा जिले के सैफई में जन्मे मुलायम ने यहीं की मिट्टी में पहलवानी की और फिर टीचर बने। इसके बाद उनका सफर सियासत के एक्सप्रेसवे पर चल निकला। जिंदगी के करीब 6 दशक तक मुलायम सिंह यादव ने सक्रिय राजनीति में हिस्सा लिया। अपने सर्वस्पर्शी रिश्तों के कारण मुलायम सिंह को नेताजी की उपाधि भी दी जाती थी। मुलायम को उन नेताओं में जाना जाता था, जो यूपी और देश की राजनीति की नब्ज समझते थे और सभी दलों के लिए सम्मानित भी थे।
यूपी में 3 दिन का राजकीय शोक, योगी ने जताया दुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुलायम सिंह यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की कामना एवं शोकाकुल परिजनों एवं समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। मुलायम सिंह यादव जी के निधन पर उत्तर प्रदेश सरकार 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा करती है। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा।
मुलायम कई बार यूपी विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रहे। इसके अलावा उन्होंने संसद के सदस्य के रूप में 11वीं, 12वीं, 13वीं और 15वीं लोकसभा में हिस्सा भी लिया। मुलायम सिंह यादव 1967, 1974, 1977, 1985, 1989, 1991, 1993 और 1996 में कुल 8 बार विधानसभा के सदस्य बने। इसके अलावा वह 1982 से 1985 तक यूपी विधानसभा के सदस्य भी रहे।
यूपी के सीएम और रक्षामंत्री भी रहे
मुलायम सिंह यादव ने तीन बार यूपी के सीएम के रूप में काम किया। वो पहली बार 5 दिसम्बर 1989 से 24 जनवरी 1991, दूसरी बार 5 दिसम्बर 1993 से 3 जून 1996 तक और तीसरी बार 29 अगस्त 2003 से 11 मई 2007 तक उत्तर प्रदेश के सीएम रहे। इन कार्यकालों के अलावा उन्होंने 1996 में एचडी देवगौड़ा की संयुक्त गठबंधन वाली सरकार में रक्षामंत्री के रूप में भी काम किया।
