– अब हाईकोर्ट करायेगा सवा सौ करोड़ की थ्रिफ्ट सोसायटी का चुनाव,डायरेक्टर होंगे अलविदा
– सदस्यों की जीत,सोशल मीडिया पर गलत बयान बाजी पर लगेगा विराम
भोपाल
पिपलानी स्थित बीएचईई थ्रिफ्ट एंड कॉ-आपरेटिव सोसायटी के नेताओं का दस माह से चल रही नूरा कुश्ती लगभग खत्म सी हो गई है । इस संस्था के एक सदस्य द्वारा दायर याचिका पर माननीय हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुये न केवल चुनाव कराने की हिदायत दे डाली बल्कि इस मुद्दे से जुड़े आला अफसरों को पार्टी बनाकर तीन सप्ताह में कोर्ट में जवाब देने का कहा है । यही नहीं इसके लिये संबंधित विभाग को प्रशासक नियुक्त कर उसकी निगरानी में चुनाव कराने का फरमान भी जारी किया है । बड़ी बात यह है कि इस दौरान सवा सौ करोड़ की संस्था के संचालक मंडल भी अलविदा हो सकता है । लोगों ने इसे सदस्यों की जीत मानते हुये कहा है कि सोशल मीडिया पर बड़े पदाधिकारियों और नेताओं की बयान बाजी पर विराम भी लगेगा ।
इसको लेकर भेल की सत्यमेव जयते पैनल ने एक पत्रकारवार्ता आयोजित कर मीडिया को सही जानकारी मुहैया कराते हुये हाईकोर्ट का पत्र भी जारी किया है । संस्था सदस्य व याचिकाकर्ता नरेश जादौन ने बताया कि इस मामले में कहीं सुनवाई ना होने पर माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा गया। माननीय न्यायालय में 12 अक्टूबर को मामले के महत्व को देखते हुए 14 अक्टूबर को सुनवाई के साथ ही इसी दिन आदेश पारित कर दिया। इस मामले में जो लोग जिम्मेदार थे उन्हें भारत सरकार के सचिव सहकारिता के माध्यम से नोटिस जारी हुये हंै क्योंकि मल्टी स्टेट सोसाइटी इसी मंत्रालय के अधीन है ।
श्री जादौन के मुताबिक सेंट्रल रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी थी कि 90 दिनों में चुनाव कराना है इसी तरह ज्वाइंट रजिस्ट्रार को कमिश्नर के माध्यम से पार्टी बनाया गया है क्योंकि उनके द्वारा नियुक्त चुनाव अधिकारी चुनाव संपन्न कराने में असमर्थ रहे निर्वाचन अधिकारी और संस्था के सम्पूर्ण बोर्ड को पार्टी बनाया गया है क्योंकि वह चुनाव कराने में असफल रहे है अब इन्हें 28 नवंबर 2022 तक कोर्ट में जवाब देना है। इसके साथ ही इसी आदेश में न्यायालय ने सेंट्रल रजिस्ट्रार को कहा है कि बोर्ड को हटाकर प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति और एक्ट के अनुसार चुनाव संबंधी प्रक्रिया को पूर्ण किया जाए। यह पूरी प्रक्रिया माननीय उच्च न्यायालय की निगरानी होगी।
श्री जादौन का कहना है कि संचालक मंडल के जो दो गुट एक दूसरे पर नूरा कुश्ती कर रहे हैं । अगर एक पैनल राजनीतिक पहुंच से चुनाव रुकवा रहा था तो अध्यक्ष और उनके साथी सचांलक उच्च न्यायालय क्यों नहीं गए उसी प्रकार अगर अध्यक्ष चुनाव नहीं करा रहे थे तो बाकी संचालक न्यायालय क्यों नहीं गए जबकि पूरा संचालक मंडल 5 साल मिलकर कार्य किया है।
अध्यक्ष ने चुनाव करानेे फिर छोड़ा नया शिगूफा
संस्था के चुनाव को लेकर इतिहास में पहली बार चुनाव अधिकारी और चुनाव की तारीख की घोषणाऐं तो होती रहीं लेकिन हुआ कुछ नहीं । अब जैसे ही कोर्ट ने चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुये प्रशासक की निगरानी में चुनाव कराने की प्रक्रिया के लिये आदेशित किया उसी दिन संस्था के अध्यक्ष ने एक प्रेस नोट जारी कर संस्था के चुनाव अधिकारी सहायक आयुक्त से सहकारिता विभाग की विभागीय कार्यो में व्यस्ता का हवाला देते हुये नये चुनाव अधिकारी एक रिटायर अपर कलेक्टर डॉ. मूलचन्द्र किशोरे को नियुक्त कर दिया जबकि बिना संचालक मंडल के नये चुनाव अधिकारी नियक्ति नहीं की जा सकती । यह सब बातें आम संस्था सदस्यों के गले नहीं उतर रही हैं इस संबंध में संस्था अध्यक्ष बंसत कुमार का कहना है कि पुराने प्रस्ताव के आधार पर नया निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है उनका कहना है कि माननीय उच्च न्यायालय ने क्या आदेश जारी किये हैं यह जानकारी अभी तक संस्था के पास नहीं हैं । जानकारों की माने तो हाई कोर्ट के आदेश के दिनांक से निवर्तमान बोर्ड उसकी सभी शक्तियों एवं कार्यो से वंचित हो गया है अथवा अब संस्था से संबंधित कोई भी निर्णय सेंट्रल रजिस्ट्रार द्वारा नव नियुक्त प्रशाशक के द्वारा ही लिया जा सकेगा यदि इस बीच अगर निवर्तमान बोर्ड संस्था से संबंंधित कोई भी निर्णय लेता है तो ऐसा कृत्य शून्य अथवा हाई कोर्ट के आदेश की अवेहलना माना जायेगा।
सत्यमेव जयते पैनल ने सदस्यों के हित में न सिर्फ संस्था में जारी भ्रष्टाचार को उजागर किया है बल्कि उसने सम्बन्धित संस्थानों में शिकायत भी की है । पैनल ने वर्तमान संचालक मंडल से अधिनियम की धारा 13 ए के तहत प्राप्त अधिकार का उपयोग करते हुए गिफ्ट की संपूर्ण प्रक्रिया , सदस्यों को बनाए जाने वाली प्रत्येक माह की जानकारी , बैलेंस शीट की जांच हेतु कमेटी के गठन ,आम सभा की छाया प्रति सहित विभिन्न जानकारियां मांगी गई लेकिन एक भी जानकारी संचालक मंडल द्वारा प्रदान नहीं की गई। पहले संस्था संचालक मंडल नियम विरुद्ध निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति करता है उन्हें इस्तीफा देना पड़ा वह मुख्य सचिव सहकारिता,रजिस्टार सहित सभी के समक्ष निवेदन किया कि संस्था के द्वारा सदस्यों को तारीख पर तारीख चुनाव के लिए दी गई 30 सितंबर गुजरने के बाद संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए क्योंकि सदस्यों को डिविडेंड नहीं बटा है जो बजट पिछले वर्ष पास हुआ था वह 30 सितंबर 2022 को खत्म हो गया बिना बजट पास किए ही संस्था की राशि खर्च किए जा रही हैं उक्त खर्चे नियमानुसार वैधानिक नहीं हैं ।
यह हैं थ्रिफ्ट के पदाधिकारी
-बसंत कुमार अध्यक्ष
-कमलेश नागपुरे – सचिव
-गौतम मोरे, उपाध्यक्ष
-भीम धुर्वे, संचालक
-संजय गुप्ता, संचालक
-राजकुमारी सैनी, संचालक
-राजेश शुक्ला, संचालक
-सत्येन्द्र कुमार,संचालक
झा बने भेल जनसंपर्क के मुखिया,शरीफ टीएक्सएम में
भोपाल भेल भोपाल के प्रचार एवं जन संपर्क विभाग की कमान अपर महाप्रबंधक विनोदानन्द झा को सौंपी है वहीं इसी विभाग में पदस्थ वष्ठि उप महाप्रबंधक शरीफ खान को टीएक्सएम विभाग भेजा गया है यह आदेश मानव संसाधन विभाग ने जारी कर दिये हैं । गौरतलब है कि श्री झा जनसंपर्क विभाग में पहले भी काम कर चुके हैं ।
