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Friday, March 27, 2026
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आजम की विधायकी जाएगी, 9 साल तक नहीं लड़ पाएंगे चुनाव! जानें सपा नेता के पास अब क्या विकल्प

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नई दिल्ली,

सपा नेता आजम खान को रामपुर कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. 2019 के हेट स्पीच मामले में कोर्ट ने उन्हें दोषी माना है और तीन साल की सजा सुना दी गई है. इस सजा के साथ ही उनकी विधायकी भी हाथ से जा सकती है. ऐसे में एक बार फिर आजम खान को जेल में जाना पड़ेगा. अब अगर आजम को जमानत चाहिए तो उन्हें निचली अदालत में बेल याचिका दायर करनी पड़ेगी. अगर वहां याचिका खारिज हुई तो उन्हें हाई कोर्ट का रुख करना पड़ेगा.

आजम खान के पास क्या विकल्प?
खुद आजम खान ने भी मीडिया से बात करते हुए कहा है कि उनके पास अभी कई विकल्प मौजूद हैं. वे राहत के लिए सेशन कोर्ट का भी रुख करने वाले हैं, और अगर वहां काम नहीं बना तो वे हाई कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाने वाले हैं. ऐसे में आजम अभी आश्वस्त नजर आ रहे हैं, लेकिन कोर्ट की सजा ने उनकी विधायकी पर खतरा जरूर डाल दिया है. अब क्योंकि रामपुर कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है, ऐसे में पूरी संभावना है कि आजम को अपनी विधायकी खोनी पड़ेगी. ऐसे में ये उनके लिए एक बड़ा सियासी झटका साबित होगा.

वैसे जिस मामले में आजम खान को ये सजा हुई है,वो 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान का है. कथित रूप से आजम खान ने रामपुर की मिलक विधानसभा में एक चुनावी भाषण के दौरान आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियां की थीं. इसकी शिकायत भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने की थी. इसी मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट 27 अक्टूबर को अपना फैसला सुनाते हुए आजम खान को दोषी करार दिया है.

आजम के चुनाव लड़ने पर लगेगी रोक?
आजम खान के वकील विनोद शर्मा ने कहा था, ‘हमने अपनी पूरी बहस कर ली है. जितने भी भाषण हैं, यह हमारे भाषण नहीं है. यह सब फर्जी तरीके से बनाए गए हैं. अभियोजन पक्ष अपना केस अदालत में साबित नहीं कर पाया है. अभियोजन और हमने अपनी बहस पूरी कर ली है. हमने जो पॉइंट्स उठाए थे, वह उसका स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए. ऐसी कोई हेट स्पीच हमने नहीं दी गई है और हमारे खिलाफ फर्जी मुकदमा तैयार किया गया है.’

वैसे आजम खान के लिए ये फैसला एक सियासी झटका तो है ही, इसके अलावा उनके चुनाव लड़ने पर भी ब्रेक लगने वाला है. असल में सन 2002 में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में किए गए संशोधन के मुताबिक सजा की अवधि पूरी होने के बाद छह साल तक चुनाव लड़ने की पाबंदी रहती है. पहले ये पाबंदी फैसला सुनाने के दिन से ही लागू होती थी. लेकिन उसमें तकनीकी खामियां दिखीं. इसके बाद संसद ने इसमें संशोधन किया. इसके मुताबिक सजा प्राप्त व्यक्ति अपनी सजा पूरी करने के बाद भी छह साल तक चुनाव नही लड़ सकेगा. वहीं जन प्रतिनिधित्व कानून के मुताबिक दो साल या इससे अधिक की सजा सुनाए जाने के बाद जन प्रतिनिधि को सदस्यता के अयोग्य घोषित किया जाता है. इसी वजह से आजम खान की विधायकी पर तलवार लटक रही है.

 

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