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पिरामिडों का देश मिस्र कैसे बना पाकिस्‍तान जैसा ‘भिखारी’ मुल्‍क, फिर क्रांति का खतरा

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काहिरा

गत 25 जनवरी को मिस्र में अरब क्रांति के 12 साल पूरे हो गए। करीब 18 दिन तक चली अरब क्रांति के बाद मिस्र में 30 साल से सत्‍ता पर काबिज तानाशाह हुस्‍नी मुबारक को सत्‍ता से हटना पड़ा था। 11 फरवरी 2011 को हुस्‍नी मुबारक के इस्‍तीफे के बाद पहली बार स्‍वतंत्र और निष्‍पक्ष तरीके से चुनाव हुए थे। इसमें मोहम्‍मद मुर्सी राष्‍ट्रपति बने लेकिन उनकी सरकार ज्‍यादा दिन नहीं चल सकी। राष्‍ट्रपति मुर्सी के खिलाफ मिस्र की सेना हो गई और जुलाई 2013 में तख्‍तापलट हो गया। मुर्सी के रक्षा मंत्री रह चुके अब्‍देल फतह अल सीसी का सेना ने साथ दिया। साल 2014 के चुनाव में अल सीसी को चुना गया। विशेषज्ञों का कहना है कि सीसी को सऊदी अरब और यूएई से अरबों डॉलर की आर्थिक मदद मिली लेकिन अब देश की हालत पाकिस्‍तान जैसे भिखारी देश की हो गई है।

मिस्र को क्रांति के बाद आईएमएफ, विश्‍वबैंक, चीन और अरब मोनेटरी फंड तथा अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक से भी काफी आर्थिक सहायता मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि मिस्र ने इस पैसे का इस्‍तेमाल शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, घर या राजस्‍व पैदा करने वाले प्रॉजेक्‍ट की बजाय मोनोरेल, राष्‍ट्रपति भवन, लग्‍जरी होटल, रोडवेज आदि को बनाने में खर्च कर डाला। खुद राष्‍ट्रपति सीसी ने 50 करोड़ डॉलर का विमान खरीद लिया। साल 2016 में मिस्र ने 50 अरब डॉलर की लागत से अपनी प्रशासनिक राजधानी का निर्माण शुरू कर दिया।

अफ्रीका की सबसे ऊंची इमारत का मिस्र में निर्माण
मिस्र ने इस नई राजधानी में अफ्रीका की सबसे ऊंची इमारत का निर्माण शुरू किया। इसके अलावा करोड़ों रुपये खर्च करके एक विशाल मस्जिद बनाई जा रही है जिसका काफी विरोध भी हो रहा है। बताया जा रहा है कि इन परियोजनाओं को सेना से जुड़ी कंपनियां बना रही हैं और इसे मुख्‍य रूप से मिस्र के उच्‍च तबके के लिए किया जा रहा है। नई राजधानी का सैन्‍य और सुरक्षा परिसर काहिरा से 45 किमी दूर है और कहा जा रहा है कि इसे भविष्‍य में होने वाले किसी विद्रोह से रोकने के लिए किया गया है।

मिस्र को उम्‍मीद थी कि इन प्रॉजेक्‍ट के पूरा हो जाने पर देश में बड़ी संख्‍या में पर्यटक आएंगे लेकिन साल 2020 में कोरोना वायरस और साल 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच हुए युद्ध की वजह से मिस्र की कमर टूट गई। पर्यटकों का पिरामिड देखने के लिए आना कम हो गया और मिस्र की मुद्रा डॉलर के मुकाबले काफी टूट गई। इससे जो सामान बाहर से मंगाया गया वह महंगा हो गया। इससे सामानों की कीमतें आसमान छू रही हैं। मांस तो खाने की थाली से गायब हो गया है और अंडा भी सपना हो गया है।

‘अल सीसी ने मिस्र को एक भिखारी देश बनाया’
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट में यहां तक कह दिया कि मिस्र कर्ज मांगने का आदि हो गया है। वहीं प्रफेसर राबर्ट स्पिंगबोर्ग का कहना है कि राष्‍ट्रपति अल सीसी ने मिस्र को एक ‘भिखारी देश’ बना दिया है। बहुत ज्‍यादा कर्ज लेने की वजह से मिस्र की सरकार के खर्च का एक बड़ा हिस्‍सा केवल ब्‍याज चुकाने में चला रहा है। वहीं मिस्र की सरकार पर आरोप है कि उसने जो लोन लिया उसका गलत जगह इस्‍तेमाल किया। एक अन्‍य विशेषज्ञ स्‍टीफन रोल का कहना है कि मिस्र ने जो लोन लिया उसका इस्‍तेमाल मुख्‍य रूप से सेना की संपत्तियों की सुरक्षा और बड़ी परियोजनाओं पर किया गया। इसमें सेना को जमकर कमाई हुई।

अल सीसी के कार्यकाल में मिस्र का कर्ज तीन गुना होकर करीब 160 अरब डॉलर पहुंच गया है। अब अल सीसी तभी तक सत्‍ता में बने रह सकते हैं जब तक कि सऊदी अरब और यूएई उसकी मदद करते हैं। इन दोनों देशों ने साफ कह दिया है कि वे अब बिना शर्त किसी को भी आर्थिक सहायता नहीं देंगे। यही वजह है कि अब अल सीसी को भारत से उम्‍मीद की किरण दिखाई दे रही है। विश्‍लेषकों का कहना है कि इसी वजह से अल सीसी भारत से मदद चाहते हैं।

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