लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकासनगर इलाके में मंगलवार रात स्कूटी में टक्कर मारकर दंपती और उनके दो बच्चों की जान ले ली। जान लेने वाले आरोपी स्कॉर्पियो चालक राजेंद्र पाल पर पुलिस मेहरबान दिख रही है। मंगलवार रात हुए हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने मौके पर ही राजेंद्र को पकड़ कर पुलिस को सौंपा था। पुलिस ने उसे हिरासत में भी लिया, लेकिन अगले दिन जब एफआईआर दर्ज की गई तो उसमें सिर्फ उसकी गाड़ी के नंबर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। यही नहीं पुलिस आरोपित को मेडिकल के लिए भी अगले दिन दोपहर बाद हॉस्पिटल ले गई, जिसमें शराब पीने की पुष्टि नहीं हुई।
विकासनगर सेक्टर-1 निवासी राम सिंह (35), पत्नी ज्ञान देवी (30), बेटे राज (14) और अंश (8) के स्कूटी (यूपी 32 केएच 2179) से मंगलवार रात को घर जा रहे थे। रात करीब 1:45 बजे शंकर जी मूर्ति तिराहे पर वह घर के लिए मुड़ रहे थे, तभी टेढ़ी पुलिया की ओर से आ रही तेज रफ्तार स्कॉर्पियो (यूपी 32 एचके 7788) ने स्कूटी में टक्कर मार दी थी। टक्कर लगते ही स्कूटी सवार दंपती व उनके बच्चे इधर-उधर उछलकर गिरे और सभी की जान चली गई। टक्कर लगने के स्कूटी स्कॉर्पियो में फंसकर कुछ दूर जाकर डिवाइडर से टकरा गई थी। तभी वहां मौजूद लोगों ने स्कॉर्पियो सवार राजाजीपुरम निवासी प्रॉपर्टी डीलर राजेंद्र पाल को पकड़ लिया, उसकी धुनाई की और करीब सवा दो बजे उसे पुलिस को सौंप दिया। पुलिस आरोपित को वहां से लेकर थाने चली आई थी।
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देर से कराया गया आरोपी का मेडिकल टेस्ट
विकासनगर थाने में बुधवार को सीतापुर के तम्बौर लहरपुर स्थित हजरतपुर के गांव हैठा निवासी राम सिंह के भाई मनीष ने तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करवाया। पुलिस ने बुधवार सुबह 11:04 बजे पर मुकदमा दर्ज किया, लेकिन एफआईआर में राजेंद्र पाल को नामजद करने के बजाए सिर्फ उसकी गाड़ी का नंबर ही दर्ज किया गया। यही नहीं मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस दोपहर 3:10 बजे राजेंद्र को भाऊराव देवरस हॉस्पिटल (सिविल हॉस्पिटल) ले गई और मेडिकल कराया। राजेंद्र का मेडिकल करने वाले डॉ. देव का कहना है कि पुलिस राजेंद्र को लेकर बुधवार दोपहर बाद हॉस्पिटल आई थी। तभी उसका मेडिकल टेस्ट किया गया था। विकासनगर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा का कहना है कि मेडिकल में शराब पीने की पुष्टि नहीं हुई है। चर्चा है कि मेडिकल में देरी होने की वजह से शराब की पुष्टि नहीं हो सकी।
‘साहब ने कहा है, हमें न्याय मिलेगा’
सीतापुर निवासी मनीष सिंह का कहना है कि जब उन्होंने थाने में तहरीर दी तो आरोपित राजेंद्र पाल हवालात में बंद था। मुझसे जैसा कहा गया, हमने वैसी तहरीर दी। हमें तब तक स्कॉर्पियो वाले का नाम भी पता नहीं था। हमें कानून की जानकारी नहीं है, लेकिन थानेदार साहब ने कहा है कि हमें और हमारे परिवार को न्याय मिलेगा। हमारे साथ अन्याय नहीं होने पाएगा। हमें पुलिस पर भरोसा है।
स्पॉट अरेस्टिंग हुई थी तो नामजद होना चाहिए
सिविल के क्रिमिनल लॉयर रोहित कांत श्रीवास्तव का कहना है कि अगर आरोपित राजेंद्र पाल की स्पॉट अरेस्टिंग हुई तो उसका नाम एफआईआर में शामिल किया जाना चाहिए था। हालांकि, पुलिस आरोपित को जेल भेजते समय पहला पर्चा काटते समय भी उसका नाम शामिल कर सकती है। पुलिस को इस केस में सभी एवीडेंस को शामिल करते हुए ठोस कार्रवाई करनी होगी। ताकि पीड़ितों के साथ न्याय हो सके।
विवेचना में शामिल होगा आरोपी का नाम
डीसीपी नार्थ एसएम कासिम आब्दी ने बताया कि आरोपित के लिखा पढ़ी में दाखिल न होने की वजह से अज्ञात में एफआईआर दर्ज की गई है। विवेचना में आरोपित का नाम दस्तावेजों में शामिल किया जाएगा। पीड़ित परिवार के साथ कोई अन्याय नहीं होने पाएगा। आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। उसे जेल भेज दिया गया है।
