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गर्वनर और एक MLC पोस्ट की डील! जीतन राम मांझी की ‘बात’ कितनी पक्की है

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पटना

13 अप्रैल 2023 की एक तस्वीर बिहार की सियासत में अचानक मौजू हो गई है। इस तस्वीर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ जीतन राम मांझी दिख रहे हैं। इस तस्वीर के सामने आते ही बिहार के सियासी गलियारे में अटकलों का दौर तेज हो गया था। इसके बाद से ही मांझी कभी नीतीश कुमार पर नरम तो कभी गरम दिखने लगे थे। मांझी के व्यवहार में अचानक आए बदलाव से ऐसा लगने लगा था कि आखिर मांझी कुछ खेल करने की फिराक में हैं क्या? इसी बीच 12 जून को पटना में विपक्षी एकता की बैठक तय हो गई। लेकिन कांग्रेस के किसी बड़े नेता के शामिल न होने से मीटिंग टल गई। इसके बाद 23 जून की नई तारीख तय की गई। लेकिन उससे पहले ही मांझी ने अपने बेटे संतोष सुमन मांझी का नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा करा दिया। अब सवाल ये कि मांझी ने अचानक इतना बड़ा फैसला कैसे ले लिया। नीचे पढ़िए हमारे विश्वस्त सूत्र से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी।

गर्वनर और एक MLC पोस्ट की डील!
हमारे सूत्र ने हमारे इन्हीं सवालों की पड़ताल के बीच एक बड़ा दावा किया। हमारे सूत्र के मुताबिक मांझी की बीजेपी से डील कितनी आगे बढ़ी ये नहीं पता। लेकिन शक है कि हरी झंडी मिलने के बाद ही जीतन राम मांझी ने अपना पहला दांव खेला है। सूत्र के अनुसार जीतन राम मांझी बीजेपी से गर्वनर की पोस्ट और बिहार में एक एमएलसी की सीट चाहते हैं। सूत्र का कहना है कि इसके जरिए मांझी एक तीर से दो निशाने साधेंगे।

मांझी का सम्मानजनक रिटायरमेंट और बेटे का भविष्य!
जीतन राम मांझी अब 75 की उम्र पार कर चुके हैं। वो भी जानते हैं कि उनके रिटायरमेंट का समय नजदीक है। ऐसे में वो अपने लिए ऑनरेबल एग्जिट यानी सम्मानजनक विदाई चाहते हैं। ऐसे में गर्वनर के पद से मुफीद और कौन सी पोस्ट हो सकती है। साथ ही मांझी अपनी विरासत अपने बेटे संतोष सुमन मांझी को सौंप चुके हैं। वो तो उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री पद के काबिल भी बता चुके हैं। मांझी चाहते हैं कि अपने रिटायरमेंट से पहले वो बेटे का बेहतर भविष्य पक्का कर दें। इसीलिए उनकी डील की ये दो शर्तें हैं।

जीतन राम मांझी की ‘बात’ कितनी पक्की है?
अब सवाल ये कि जीतन राम मांझी की डील कितनी पक्की है? हमारे सूत्र के मुताबिक जीतन राम मांझी अपने पत्ते पूरी तरह से नहीं खोल रहे। शायद वो डील को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त होना चाहते हैं। ऐसे में मांझी जैसे ही महागठबंधन छोड़ते हैं, इस बात पर मुहर लग जाएगी कि खिचड़ी काफी पहले पक गई थी। बस उसे खाना अब शुरू किया गया है।

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