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Saturday, March 7, 2026
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अब तक बेटे से मिलने नहीं दिया जा रहा…ओडिशा ट्रेन हादसे के ड्राइवर के पिता का छलका दर्द

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भुवनेश्वर

पिछले तीन दशकों में देश की सबसे भीषण रेल हादसे में ट्रेन चालक का परिवार अभी भी उससे मिलने की आस लगाए बैठा है। गुनानिधि मोहंती के परिवार को दुर्घटना के बाद से उसे देखने या मिलने की इजाजत नहीं दी गई। कटक के चहल-पहल भरे शहर से 10 किलोमीटर दूर नाहरपाड़ा गांव की छोटी-छोटी गलियों में दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी वैसा ही माहौल है। खेल का मैदान हो या फिर चाय की दुकान लोग यही सवाल उठाते रहते हैं कि क्या गुनानिधि मोहंती ट्रेन को तेज रफ्तार से चला रहे थे?

क्या बोले ट्रेन ड्राइवर के पिता?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 80 वर्षीय बिष्णु चरण मोहंती कहते हैं कि, ‘गांव में हर कोई सोचता है कि दुर्घटना के लिए मेरा बेटा जिम्मेदार है। लेकिन वह पिछले 27 सालों से ट्रेन चला रहे हैं और उन्होंने कभी गलती नहीं की थी। मुझे कैसे पता चलेगा कि उस शाम क्या हुआ था? मैंने अपने बेटे से बात भी नहीं की है। मैं केवल उनके घर आने का इंतजार कर रहा हूं। 2 जून को, गुनानिधि मोहंती खड़गपुर से भुवनेश्वर तक कोरोमंडल एक्सप्रेस के ड्राइवर थे। उस वक्त बालासोर के बहानगा बाजार में ट्रेन एक ‘लूप लाइन’ में बदल गई, जहां पहले से खड़ी मालगाड़ी से वह टकरा गई। भीषण टक्कर से कई डिब्बे पटरी से उतर गए, जिनमें से कुछ यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस के ट्रैक पर चले गए और कुछ दुर्घटनाग्रस्त हो गए।

बुरी तरह से घायल हुए गुनानिधि मोहंती
रेल हादसे वाले दिन शाम 7 बजे से पहले, गुनानिधि तीन दशकों में भारत की सबसे खराब रेल दुर्घटना का हिस्सा बन गए थे। दुर्घटना में 291 लोग मारे गए थे, जबकि 1,100 से अधिक घायल हुए थे। घायलों में से एक गुनानिधि खुद हैं, जिन्हें भुवनेश्वर के एएमआरआई अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी तीन पसलियां टूट गईं और सिर पर गंभीर चोट थी। तब से पूर्व फौजी बिष्णु चरण अपने बेटे के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

भाई ने आखिरी बार आसीयू में देखा
गुनानिधि के बड़े भाई संजय मोहंती, जो कि स्थानीय अदालत में वकील हैं, वह उसी दिन मिलने गए थे लेकन तब गुनानिधि आईसीयू में थे। इसके बाद से परिवार का कोई सदस्य उनसे नहीं मिल पाया।ईस्ट कोस्ट रेलवे के चिकित्सा विभाग में कार्यरत एक डॉक्टर ने चार दिन पहले गुनानिधि को अस्पताल से छुट्टी दे दी थी। लेकिन उनके पिता और भाई का कहना है कि वे नहीं जानते कि गुनानिधि कहां हैं?

रेलवे अधिकारी कर रहे किनारा
भाई ने कहा कि मुझे यकीन है कि वह अभी भी अस्पताल में है। किसी ने हमें मेरे भाई के बारे में कुछ नहीं बताया। गुनानिधि जहां कार्यरत हैं, वहां के ईस्ट कोस्ट रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ने भी उनकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में कोई जानकारी देने से मना कर दिया। ईस्ट कोस्ट रेलवे के पीआरओ विकास कुमार ने कहा कि, ‘स्वास्थ्य एक निजी मुद्दा है और हम उस पर टिप्पणी नहीं कर सकते। इसके अलावा दो जांच (सीआरएस और सीबीआई ) जारी हैं। इसलिए हम टिप्पणी नहीं कर पाएंगे।’

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