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‘मुझे भी सीएम बनना है’ कहकर अजित पवार ने उड़ाई एकनाथ शिंदे की नींद

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मुंबई

बुधवार को पार्टी विधायकों को बैठक में बोलते हुए अजित पवार ने एक बार फिर अपने दिल की इच्छा को जुबां पर लाया। अजित पवार ने कहा कि मैं पांच पार उपमुख्यमंत्री बन चुका हूं। आखिर मेरा भी मन मुख्यमंत्री बनने का करता है। बांद्रा में शक्तिप्रदर्शन के दौरान अजित पवार ने कहा, ‘मैं लोगों के कल्याण के लिए अपनी कुछ योजनाओं को लागू करने के लिए महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना चाहता हूं।’ अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि उनके कारण ही एनसीपी को इतने सालों तक अपना सीएम नहीं मिला। अजित ने सवाल किया कि हर बात में उन्हें ही विलेन क्यों बनाया गया? पांच बार उपमुख्यमंत्री बना हूं, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन पाया। ऐसा नहीं है कि मौका नहीं मिला। मौका आया, पर बनने नहीं दिया गया। अब अजित पवार की इस इच्छा के बाद महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे और उनके खेमे की नींद उड़ी हुई हैं।

शिंदे गुट इस बात को अच्छे से जानता है कि अजित पवार अपनी इच्छा पूर्ती के लिए ही सरकार में शामिल हुए हैं। बीजेपी भले ही यह कह रही हो कि साल 2024 में भी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जायेगा और वही सीएम भी बनेंगे। लेकिन अजित पवार की एंट्री से शिंदे गुट का बीजेपी पर भरोसा कुछ कम हुआ है।

उदय सामंत का पलटवार
इस मुद्दे पर एकनाथ शिंदे गुट के मंत्री उदय सामंत ने कहा है कि अजित दादा के सरकार में शामिल होने से शिवसेना का कद कम नहीं हुआ है। ऐसा नहीं है कि सरकार में शामिल होने के बाद वो मुख्यमंत्री बन जाएंगे और एकनाथ शिंदे इस्तीफा देंगे। यह सब जो लोग बोल रहे हैं वो कभी नही होगा। महाराष्ट्र में बीजेपी के सर्वेसर्वा देवेंद्र फडणवीस कई बार बोल चुके हैं कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में ही आगामी चुनाव होगा। एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री पद को खतरा है। ऐसा कुछ विरोधी बोल रहे हैं लेकिन इसमें कोई सच्चाई नही है।

बीजेपी बर्बाद कर देगी
एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने बुधवार को अजित पवार गुट पर तंज कसते हुए कहा कि ‌बीजेपी ‌‌से हाथ मिलाने वाला हर सहयोगी दल तबाह हो जाता है अजित गुट का भी यही हश्र होगा। शरद पवार ने कहा, बीजेपी के साथ जिसने भी हाथ मिलाया और सत्ता में हिस्सेदारी की। वह राजनीतिक रूप से तबाह ही हुए। अपने राजनीतिक सहयोगियों की जड़ें काटना बीजेपी की नीति है। दूसरे राज्यों में इसकी कई मिसालें हैं।’ उनका कहना था, ‘अकाली दल, बीजेपी के साथ लंबे समय से था लेकिन अब कहीं नहीं है। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और बिहार में यही हालात हुए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसका अहसास हो गया था और फिर उन्होंने आरजेडी के साथ गठबंधन कर लिया।

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