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योगी सरकार की ट्रांसफर पॉलिसी: चार महीने पहले वालों को हटाया, वर्षों से जमे लोग को छुआ तक नहीं

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नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश के स्टांप एवं निबंधन विभाग से हाल ही में जारी हुई तबादला सूची पर व‍िवाद खड़ा हो गया है और सरकार भ्रष्‍टाचार के आरोपों के घेरे में आ गई है। अफसर, नेता सभी इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कोई खुले आम बोल रहा है तो कोई ब‍िना सामने आए गड़बड़ी के प्रमाणों की तरफ इशारा कर रहा है। एक बड़े अधिकारी ने बताया कि इस विभाग के तबादले में हर एक स्तर पर गड़बड़ी की गई है। सबसे ज्यादा हेराफेरी रजिस्ट्रार के तबादले में की गई है।

विधायक ने उपमुख्यमंत्री को लिखा पत्र
ट्रांसफर में कथ‍ित भ्रष्टाचार के आरोपों पर कांग्रेस के पूर्व विधायक दीपक सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार खुद ट्रांसफर घोटाले में फंस गई है। पिछले साल ट्रांसफर घोटाले का खुलासा लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद ने खुद चिट्ठी लिख कर किया था। इस सत्र में भी बड़े पैमाने पर ट्रांसफर घोटाले हुए हैं। दीपक स‍िंंह ने उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य को पत्र भी लिखा है। इसमें सिंह ने लिखा है कि सरकार की तबादला नीति से हटकर ट्रांसफर किए गए हैं। चार महीने, आठ महीने, एक साल या दो साल तक तैनात रहे अफसरों का तबादला कर द‍िया गया है, जबकि तीन साल से ज्‍यादा एक ही जगह पर नौकरी कर चुके अधिकारियों को नहीं बदला गया है। पूर्व विधायक ने कहा कि ग्राम विकास, स्टांप एवं निबंधन, परिवहन आदि विभागों में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है। इसकी जांच होनी चाहिए।

डिप्टी सीएम बोले- घोटालेबाजों पर है पैनी नजर
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने यह कह कर बचाव क‍िया क‍ि कांग्रेस और सपा सरकार में बड़े बड़े घोटाले हुए हैं। कांग्रेस को पहले अपने कार्यकाल के घोटाले की जांच करवानी चाहिए। बाकी उत्तर प्रदेश सरकार ट्रांसफर सूची की जांच करवा लेगी। गड़बड़ी मिलने पर तबादला सूची निरस्त की जाएगी। इसमें लिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। योगी सरकार में भ्रष्टाचार करने वाले जेल जाएंगे। कोई बचने वाला नहीं है। सरकार की पैनी नजर सभी पर है।

इससे पहले इसी तरह के मामले सामने आने पर तबादला सूची रद कर दी गई थी और मंत्री नंद गोपाल नंदी पर भी गाज ग‍िरी थी। उनकी कुर्सी जाने के कई कारणों में एक इसे भी माना गया। स्टांप एवं निबंधन विभाग के मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा कि तबादला सूची की जांच होगी। गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ मुख्यमंत्री को पत्र लिखा जाएगा। योगी सरकार की तबादला नीति में एक जगह पर तीन साल से ज्‍यादा समय से तैनात रहने वाले अधिकारियों को जिले के बाहर भेजने की बात है। लेकिन स्टांप एवं निबंधन विभाग में हुए तबादलों में इस न‍िर्देश की अनदेखी की गई है।

कई ऐसे अफसर दूसरी जगह भेज द‍िए गए हैं, ज‍िन्‍हें तैनात हुए 4 माह, 8 माह, 9 माह, एक साल और ज्‍यादा से ज्‍यादा दो साल ही हुए हैं। सुबोध कुमार राय गाजियाबाद सदर में 4 महीने रजिस्ट्रार थे। वह गोरखपुर सदर के रजिस्ट्रार हो गए है। धीरेंद्र कुमार राय नौ माह में चंदौली से लंभुआ सुल्तानपुर, ब्रजेश पाठक 8 माह में कादीपुर सुल्तानपुर से रायबरेली,अजय धर्मराज सिंह एक साल में सोनभद्र से वाराणसी, अवधेश मिश्र दो साल में करनैलगंज गोंडा से फतेहपुर, धर्मेंद्र चौधरी दो साल में आगरा से बांगरमऊ उन्नाव, भरत कुमार जुमनानी दो साल फिरोजाबाद में से मोदी नगर गाजियाबाद भेज द‍िए गए हैं।

आरोप है क‍ि इन अध‍िकार‍ियों में से कई ने गलत तरीके से मनचाही जगह पर तबादला करवाया है। दूसरी ओर, तीन साल से ज्‍यादा बीत जाने के बाद भी ज‍िन अध‍िकार‍ियों का तबादला नहीं हुआ, ऐसे कई अध‍िकार‍ियों ने ट्रांसफर के ल‍िए ऑनलाइन आवेदन क‍िया था। इनका तबादला नहीं हुआ। एक रजिस्ट्रार ने कहा कि पौने चार साल की तैनाती के बाद उन्‍होंने ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन क‍िया था, लेकिन अर्जी नहीं सुनी गई।

सहायक महानिरीक्षक नवीन सिंह सुल्तानपुर में केवल छह महीने के कार्यकाल के बाद बाराबंकी में तैनात किए गए हैं। इनके स्थान पर अलका सिंह सुल्तानपुर में तैनात की गई है। जबकि अलका सिंह अयोध्या मंडल में पौने नौ साल पूरा कर चुकी हैं। तबादला नीति के अनुसार अलका सिंह की तैनाती अयोध्या मंडल के बाहर होनी थी। एक अधिकारी ने बताया कि तबादला नीति के मुताब‍िक तीन साल जनपद और सात साल मंडल में तैनाती हो गई है तो उस जनपद या मंडल से बाहर ट्रांसफर करना है।

सोनभद्र के रजिस्ट्रार अजय धर्मराज सिंह एक साल के अंदर ही वाराणसी भेजे गए हैं। एक साल की नई नौकरी वाले कनिष्ठ सहायक अब्‍बास रब्बानी अमेठी से सीधे लखनऊ की कुर्सी पर बैठ गए हैं। जबकि नई नियुक्ति में तीन साल तक तबादले का नियम नहीं है। श्याम सिंह विषेन गौतमबुद्ध नगर में सहायक महानिरीक्षक थे। इन्हें हटाकर कानपुर भेजा गया है। इनके स्थान पर शशिभान मिश्र को हरदोई से गौतमबुद्ध नगर भेजा गया है। राजस्‍व के ल‍िहाज से गौतमबुद्ध नगर सबसे ज्यादा आमदनी वाला जिला है।

स्टांप एवं निबंधन विभाग में 129 को नई जिम्मेदारी पर भेजा गया है। 46 रजिस्ट्रार,17 सहायक महानिरीक्षक और कनिष्ठ सहायकों के तबादले किए गए हैं। जबकि 30 नए रजिस्ट्रार की तैनाती की गई है।19 रजिस्ट्रार प्रोन्नति पाकर सहायक महानिरीक्षक के पद पर तैनात किए गए हैं। 8 सहायक महानिरीक्षक प्रोन्नति पाकर उप महानिरीक्षक के पद पर तैनात किए गए हैं। सहायक महानिरीक्षक और उप महानिरीक्षकों की तैनाती प्रमुख सचिव लीना जौहरी की कलम से की गई है। जबकि रजिस्ट्रारों के तबादले महानिरीक्षक निबंधन कंचन वर्मा के हस्ताक्षर से हैं। सरकार की तबादला नीत‍ि के मुताब‍िक ट्रांसफर नहीं होने का आरोप लगाने वाले कई अफसर आंदोलन करने के व‍िकल्‍प पर भी व‍िचार कर रहे हैं।

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