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मप्र चुनाव : पुरुषों की तुलना में ज्यादा वोटिंग, कई सीटों पर प्रभाव, किसके साथ जाएंगी मध्य प्रदेश की महिला वोटर?

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नई दिल्ली

मध्य प्रदेश का रण साल के आखिर में होने जा रहा है। हर चुनाव की तरह यहां भी जातियों का बोलबोला है, धर्म का एंगल है और जुबानी जंग भी तेज चल रही है। लेकिन जातियों से ऊपर, धर्म से इतर एक ऐसा वोटबैंक भी है जो निर्णायक भी रहता है और किसी को भी सत्ता में ला सकता है। ये वोटबैंक मध्य प्रदेश की महिलाओं का है। उन महिलाओं का जिनका समाज में तो पूरा योगदान है ही, पिछले कुछ सालों में राज्य की राजनीति में भी काफी असर देखने को मिला है।

अब मध्य प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी ज्यादा इसलिए भी हो गई है क्योंकि पुरुषों की तुलना में वोटिंग के मामले में भी वे ज्यादा आगे दिखाई पड़ रही हैं। एक आंकड़ा बताता है कि एमपी में इस बार कुल 15 लाख पहली बार वोट डालने वाले लोग हैं, यानी कि फर्स्ट टाइम वोटर। यहां भी महिलाओं की संख्या 7 लाख से ज्यादा बताई जा रही है। ये बताने अब ये सात लाख महिलाएं अपना वोट किस तरह से करने वाली हैं, इस पर सभी पार्टियों की नजर है। यहां ये समझना भी जरूरी है कि राज्य में कुल 5.39 करोड़ मतदाता हैं, वहां भी 48.20 फीसदी महिलाएं हैं। राज्य की कुल 50 ऐसी सीटे हैं जहां वर्तमान में पुरुषों की तुलना में महिला वोटर ज्यादा हैं। इसमें 18 आरक्षित सीटों को भी शामिल किया गया है।

एक आंकड़ा ये भी बताता है कि राज्य में आदिवासी बहुल सीटों पर महिला वोटर्स ज्यादा सक्रिय हैं। वो पुरुषों की तुलना में ज्यादा वोट कर रही हैं। ऐसी 15 विधानसभा सीटें मौजूद हैं जहां पर महिलाएं ही किंगमेकर की भूमिका निभा रही हैं। जिस प्रत्याशी को उनका वोट मिल जाएगा, वहां पर उसकी जीत सुनिश्चित मानी जाएगी। अब महिलाओं की इसी अहमियत को सभी पार्टियों ने बखूबी समझ लिया है। एक तरफ ‘मामा’ वाली छवि के साथ शिवराज सिंह चौहान महिला वोटरों के बीच खुद को लोकप्रिय बनाए रखने की कोशिश में लगे हैं तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की तरफ से भी कर्नाटक की तर्ज पर महिलाओं के लिए अलग से घोषणा पत्र लाने की तैयारी की जा रही है। यानी कि जिसको भी सत्ता में आना है, उसे महिला मतदाताओं को अपने पाले में लाना पड़ेगा।

अब इसी कवायद में दोनों बीजेपी और कांग्रेस ने अपनी-अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। बीजेपी को इस बार जिस एंटी इनकमबैंसी का सामना करना है, उससे बाहर निकलने का रास्ता भी ये महिला वोटर ही बताई जा रही हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जो मामा नाम दिया गया है, वो अपने आप में ही महिला वोटरों के बीच में सीएम को लेकर एक समर्थन है। ऐसे में बीजेपी एक बार फिर चुनावी मौसम में उस छवि को भुनाना चाहती है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाडली बहना योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीना 1000 रुपये दिया जा रहा है।

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