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…तो चंद्रमा पर अब कभी नहीं जागेंगे विक्रम और प्रज्ञान? उम्मीद के कुछ ही घंटे बाकी फिर भी ISRO क्यों खुश

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नई दिल्ली

इसरो के मून मिशन में विक्रम और प्रज्ञान की भूमिका क्या खत्म होने वाली है। यह सवाल पिछले 10 दिन से लगातार चर्चा में बना हुआ है। चंद्रमा की दक्षिणी ध्रुव पर सुबह होने के बाद 21 सितंबर से ही लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान को जगाने की कोशिश इसरो की तरफ से की जा रही है। हालांकि, इसरो को अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। चंद्रमा पर तीन दिन में फिर से रात हो जाएगी। ऐसे में लैंडर विक्रम और प्रज्ञान के जागने की उम्मीदों के कुछ घंटे ही बाकी हैं। इससे पहले इसरो ने कहा था कि चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान के साथ सम्पर्क करने के प्रयास किए हैं, ताकि उनके सक्रिय होने की स्थिति का पता लगाया जा सके। हालांकि,अभी तक उनसे कोई सिग्नल नहीं मिला है। लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान को इस महीने की शुरुआत में ‘स्लीप मोड’ में डाल दिया था। हालांकि, लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान ने अपना काम पूरा कर लिया है। इस वजह से इसरो इनके काम से खुश है।

लैंडर विक्रम और रोवर का क्या होगा?
अब सवाल है कि यदि तीन दिन के भीतर लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान से संपर्क नहीं हुआ तो उनका क्या होगा। जानकारों के अनुसार चंद्रमा पर रात होने पर तापमान शून्य से 120-200 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता है। जब 20 सितंबर को चंद्रम पर सुबह हुई थी तो दो से तीन दिन में लैंडर और रोवर के फिर से एक्टिव होने की उम्मीद थी। ये दोनों चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में हैं। चंद्रमा पर सूर्योदय के 12 दिन बीत चुके हैं। अभी तक कोई भी पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं आया है। अब यदि इसरो उन्हें फिर से एक्टिव करने में सफल नहीं हुआ तो वे साउथ पोल पर ही डिएक्टिव हो जाएंगे।

चंद्रयान-3 से क्या-क्या मिला?
लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान ने चंद्रमा पर अपने नियोजित दो सप्ताह के जीवनकाल को पूरा कर लिया है। चंद्रयान-3 में लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान ने कई अभूतपूर्व प्रयोग किए हैं। साथ ही मूल्यवान डेटा एकत्र किया है। उनकी उपलब्धियों में विक्रम के जरिये चंद्रा सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट (ChaSTE) नामक ऑनबोर्ड पेलोड का संचालन था। इसने पहली बार विभिन्न गहराई पर चंद्रमा की सतह का तापमान मापा। भारत के चंद्रयान मिशन ने अब तक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए ‘बेजोड़ डेटा’ प्रदान किया है। इससे विभिन्न आयामों से चंद्रमा की खोज का रास्ता खुला है। इसरो के तीन चंद्रयान मिशनों ने चंद्रमा पर पानी की बर्फ, अनदेखे खनिजों और तत्वों की उपस्थिति और तापमान परिवर्तन पर अधिक रोशनी डाली है। 2019 में चंद्रयान -1 ने चंद्रमा खनिज विज्ञान मैपर का यूज किया था। उसने पहली बार ध्रुवीय क्षेत्र के पास 60,000 करोड़ लीटर पानी की बर्फ की उपस्थिति का संकेत दिया था।

इतिहास में दर्ज हो गया शिवशक्ति प्वाइंट
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा लॉन्च किए गए चंद्रयान -3 मिशन ने 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सफलतापूर्वक उतरकर इतिहास रच दिया। इसने भारत को ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाले पहले देश बना था। चंद्रमा के लैंडिंग साइट को शिव शक्ति पॉइंट नाम दिया गया है। चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव से लगभग 4,200 किलोमीटर दूर, मंज़िनस सी और सिम्पेलियस एन क्रेटर के बीच स्थित है। मिशन में महिला वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करने के लिए ‘शिव शक्ति’ नाम चुना गया था।

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