भोपाल
भवानी नगर में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद भागवत हरिकथा में कथा वाचक पंडित नरेन्द्र नागर ने आज श्रीकृष्ण की किशोर अवस्था के विभिन्न प्रसंगों एवम प्रिय सखा सुदामा के प्रसंग को अपनी चिर परिचित लोकप्रिय स्थानीय भाषा में रोचकता के साथ प्रस्तुत कर कथा मंडप में आनंद का वातावरण निर्मित कर दिया।हठीले,नटखट कृष्ण की लीलाओं के वृतांत को संगीतमय सुमधुर भजनों के माध्यम से प्रस्तुत कर माखन चोरी ,मटकी फोड़ने के दृश्य को सजीव बना दिया।
“मैया मोरी मैं नहीं माखन खायों” “ग्वाल बाल सब मिलकर के बरबस मुख लपटायो”श्री नागर ने कृष्ण सुदामा के दोस्ती की व्याख्या कर दोस्ती के महत्व की जानकारी दी।उन्होंने कहा की हमे भी अपने जीवन में कृष्ण की भाती सुदामा की तरह विश्वास पात्र,प्रिय दोस्त बनाना चाहिए।कथा में मटकी फोड़ने के दृश्य को सजीव रूप से प्रस्तुत किया गया। तासू जैन कृष्ण एवम सम्भव जैन ने बलराम के वेश में जैसे ही कथा मंडप में प्रवेश किया ,उपस्थित जन समुदाय ने हर्षोल्लास के साथ फूलो की बरसात कर अभिनंदन किया।
साथ ही सुमधुर भजन की प्रस्तुति ने दृश्य को और अधिक सुंदर बना दिया।सुंदर मनमोहक कृष्ण ने,बलराम एवम गोप, ग्वालों के साथ ऊपर लटकी हुई मटकी फोड़कर खूब दही लुटाया।श्री नरेंद्र नागर जी ने वैदिक मंत्रोचार कर यज्ञ/हवन करवाया। पंडित नरेन्द्र नागर ने श्री महेश राजपूत,श्री रघुनंदन सिंह राजपूत( कुन्नू भैया),शिशिर माहेश्वरी,देवेंद्र जैन, उमा शंकर,तिलवाणी जी,संतोष सक्सेना,सुभाष पगारे,सुरेश सोनपुरे,मनीष शर्मा, जी डी शुक्ला,अहिरवार जी,देवेंद्र कश्यप,निर्भय नेमा,राजू जैन,अमित आदि का प्रमुख रूप से शाल व पुष्पहार से सम्मान किया।अन्त में विशाल भंडारे के साथ श्रीमद भागवत हरिकथा का समापन हुआ।
