नई दिल्ली
चीन की अर्थव्यवस्था की हालत खराब है। चीन में प्रॉपर्टी संकट गहरा गया है। बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है। वहीं अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होती जा रही है। चीन की अर्थव्यवस्था में संकट के कई कारण है। चीन में धीमी होती विकास दर, कम विदेशी निवेश, प्रॉपर्टी सेक्टर का संकट, कमजोर निर्यात, कमजोर मुद्रा, युवाओं की लगातार बढ़ रही बेरोजगारी से संकट बढ़ता जा रहा है। चीन की जनता ने अपने कुल निवेश का लगभग 70 फीसदी रियल एस्टेट में कर रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 के आखिर तक यहां के लगभग 78 करोड़ चीनी नागरिक कर्ज में डूब चुके थे और उन पर सारा कर्ज रियल एस्टेट का था। साल 2021 में चीन की सरकार ने बिल्डरों के कर्ज लेने की लिमिट को सीमित कर दिया। इसके बाद कई बिल्डर डिफॉल्टर हो गए हैं। सैकड़ों प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पा रहे हें। लोगों ने भी अब किस्ते चुकाना बंद कर दिया है। अब चीन में लोगों ने पैसों को खर्च करना बंद कर दिया है। लोग अब पैसे बचा रहे हैं। इससे अर्थव्यवस्था और सुस्त पड़ गई है।
घट रहा विदेशी निवेश
सख़्त ज़ीरो कोविड नीति लागू रखने की वजह से चीन की अर्थव्यवस्था बहुत कम वक़्त के लिए संभल सकी थी। अब चीन में प्रॉपर्टी बाज़ार का संकट गहरा होता जा रहा है। चीन में महंगाई दर और विदेशी निवेश घटते जा रहे हैं और स्थानीय सरकारों पर क़र्ज़ का बोझ बढ़ता जा रहा है। हाल के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़, पिछले तीन महीनों से चीन में बेरोज़गारी की दर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अब चीन में लोगों ने खर्चा करना बेहद कम कर दिया है। अब चीन में लोग बचत भी कर रहे हैं। चीन के आम लोगों के बीच बचत में इज़ाफ़ा करने की बढ़ती ख़्वाहिश से चीन के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से संतुलित कर पाना ज़्यादा मुश्किल होगा।
कर रहे बचत
चीन में अब लोग जमकर बचत कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले लोग सुपर मार्केट में खूब खर्च करते थे। अब लोग बचत करने के लिए एक लिस्ट बनाकर जाते हैं और जरूरत के मुताबिक खर्च कर रहे हैं। लोगों ने अब ग़ैर ज़रूरी ख़र्च भी बंद कर दिए हैं। चीन में लोग अब बचत करने के लिए पुराने तरीके अपना रहे हैं। चीन में अब ज्यादातर लेनदेन कैश में होता है। लेकिन अब लोग घर पर कैश जमा कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि इससे उनका खर्च कम होता है। इसका असर भी चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
