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Tuesday, April 28, 2026
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पक्षपातपूर्ण वाली USIRCF की रिपोर्ट को भारत ने किया खारिज, धार्मिक भेदभाव पर अमेरिका को खूब सुना दिया

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नई दिल्ली:

भारत ने आज अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग यूएससीआईआरएफ की उस रिपोर्ट को खारिज दिया। जिसमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर भेदभावपूर्ण राष्ट्रवादी नीतियों को बढ़ावा देने का आरोप लगा था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारत की आलोचना करने वाली इस रिपोर्ट को पक्षपाती बता दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यूएससीआईआरएफ अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भारत को लेकर दुष्प्रचार जारी है।

हमें उम्मीद नहीं है कि यूएससीआईआरएफ कभी भारत की विविध और लोकतांत्रिक लोकाचार को समझने की कोशिश करेगा। भारत ने रिपोर्ट पर तीखा हमला करते हुए कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की उनकी कोशिश कभी सफल नहीं होगी। अमेरिकी आयोग ये सब कुछ भारतीय लोकसभा चुनाव में हस्तक्षेप करने के लिए कर रहा है लेकिन वो कभी भी इसमें सफल नहीं हो पाएगा।

क्या है यूएससीआईआरएफ
यूएससीआईआरएफ को 1998 के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत अमेरिकी संघीय सरकार के एक आयोग के रूप में बनाया गया था, जिसके सदस्यों को राष्ट्रपति और सीनेट और प्रतिनिधि सभा में दोनों राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा नियुक्त किया जाता है। अपनी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, यूएससीआईआरएफ ने दावा किया है कि 2023 में, भाजपा के नेतृत्व में भारत सरकार ने सांप्रदायिक हिंसा से प्रभावी ढंग से निपटने में विफल रही, जिसका मुस्लिम, ईसाई, सिख, दलित, यहूदी और आदिवासी जैसे विभिन्न धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों पर अधिक प्रभाव पड़ा।

भारत ने दिया रिपोर्ट का सख्त लहजे में जवाब
भारत ने गुरुवार को अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग की उस रिपोर्ट पर कहा कि ये संगठन पूरी तरह से पक्षपाती है। ये रिपोर्ट पक्षपाती और राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित है और महज एक प्रचार से ज्यादा कुछ नहीं है।

रिपोर्ट में क्या- क्या है?
यूएससीआईआरएफ ने जो रिपोर्ट जारी की है उसमें कहा गया है कि 2023 से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। भारत की सरकार मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों, दलितों, यहूदी और आदिवासी को प्रभावित करने वाली सांप्रदायिक हिंसा को संबोधित करने में विफल रही है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि धार्मिक अल्पसंख्यकों पर रिपोर्टिंग करने वाले समाचार मीडिया और एनजीओ को एफसीआरए नियमों के तहत निगरानी में रखा गया था।

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