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सेना में जाने की चाह में चीन और भारत से आगे पाकिस्तानी युवा… रूस, इजरायल, जापान को खोजे नहीं मिल रहे सैनिक, खुलासा

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इस्लामाबाद

दुनिया के कई ऐसे देश जो युद्ध लड़ रहे हैं या फिर निकट भविष्ट में हमले की आशंका के चलते चिंतित हैं। उनको लड़ने के लिए सैनिक नहीं मिल रहे हैं। ये देश अपनी सैन्य तकनीक बढ़ा रहे हैं और रक्षा बजट में भी इजाफा कर रहे हैं। इसके बावजूद इनके पास भर्ती के लिए युवाओं का टोटा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण रूस और यूक्रेन युद्ध में देखा गया है। दोनों ही देश लड़ने के लिए सैनिकों की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। यहां तक कि अमेरिका भी इसी तरह की समस्याओं का सामना कर रहा है। अमेरिकी युवाओं के बीच भी लड़ने की इच्छाशक्ति की कमी हो रही है। एशिया के देशों को भी पर्याप्त सैनिकों को बनाए रखना एक कठिन चुनौती बनती जा रही है, हालांकि इस मामले में पाकिस्तान के युवा अलग हैं और फौज में जाने के लिए उत्साहित हैं।

यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल जैसा युद्ध में उलझा देश या लड़ाई की आशंका का सामना कर रहे जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देश भी सैनिकों की कमी का सामना कर रहे हैं। इजरायल को मध्य पूर्व की सबसे शक्तिशाली सेना माना जाता है लेकिन उसकी प्रतिष्ठा दांव पर है। इजरायल के पास केवल 15,000 सक्रिय लड़ाकू सैनिक हैं। इजरायल इस समय रिजर्विस्टों और रिजर्व ब्रिगेडों पर निर्भर है। इन आरक्षित लोगों में किसान और कर्मचारी हैं। ताइवान के सामने भी बीजिंग के हमले का डर है लेकिन सैनिक उसके पास नहीं है। ताइवान विदेशी नागरिकों को सेना में भर्ती करने पर विचार कर रहा है। अमेरिका भी गैर-अमेरिकियों को सेना में शामिल होने और नागरिकता के लिए आवेदन करने की अनुमति देता है। उत्तर कोरिया से तनातनी के बीच दक्षिण कोरिया के सामने भी घटती सैनिकों की तादाद इस समय चुनौती बन रही है।

सेना में जाने में फिजी टॉप पर, पाकिस्तान भी भारत से आगे
जापान की सेना (एसडीएफ) में भीहर साल भर्ती आवेदनों में गिरावट देखी जा रही है। जापान टाइम्स के अनुसार, पिछले दस वर्षों में पिछले नवंबर में एसडीएफ के लिए आवेदकों की संख्या में लगभग 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। गैलप इंटरनेशनल के 2015 के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि जापानी अपने देश के लिए लड़ने के लिए सबसे कम इच्छुक थे, केवल 11% ने कहा कि वे ऐसा करेंगे, जबकि दक्षिण कोरिया में 42% और चीन में 71% युवा सेना में जाकर लड़ने के लिए तैयार थे।

रिपोर्ट कहती है कि सबसे बड़ी सेना वाला देश चीन भी 71 फीसदी युवाओं के सेना में जाकर लड़ने के इच्छुक होने के बावजूद पर्याप्त भर्तियों को आकर्षित करने के लिए संघर्ष कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि गैलप सर्वे में पाकिस्तान चीन और भारत से आगे हैं। पाकिस्तान के 89 प्रतिशत युवा लड़ने के इच्छुक हैं। भारत के 75 फीसदी और चीन उससे भी कम 71 फीसदी पर है। इस सूची में 94 प्रतिशत के साथ मोरक्को और फिजी शीर्ष पर हैं।

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