जम्मू-कश्मीर:
जम्मू-कश्मीर के कठुआ में सोमवार को हुए आतंकी हमले में पांच सैनिक शहीद हो गए। इस हमले में पांच जवान घायल हो गए, जिनका पठानकोट के आर्मी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। सेना के सूत्रों के मुताबिक, हमले के पीछे लोकल गाइड की भूमिका सामने आई है, जिसने आतंकवादियों के लिए मुखबिरी की। बताया जाता है कि सेना के 10 जवान सोमवार दोपहर करीब 3:10 बजे गश्त पर निकले थे। जब काफिला दूरदराज के बदनोटा गांव में एक नाले पर बने पुल पर पहुंचा, तब आतंकवादियों के दो दिशाओं से हमला किया। पहले उन्होंने काफिले पर ग्रेनेड फेंका। धमाके के बाद तुरंत आतंकियों ने दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू कर दी। करीब 12-13 मिनट तक जबर्दस्त फायरिंग की। धमाके और गोलीबारी से इलाका धुआं-धुआं हो गया। जब सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई शुरू की तो आतंकवादी जंगल में भाग गए। इस हमले में शहीद हुए सैनिकों को कुछ सप्ताह पहले ही कठुआ के माचेडी में तैनात किया गया था। आतंकी संगठन कश्मीर टाइगर्स ने ली कठुआ हमले की जिम्मेदारी ली है, जो जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा है।
दो महीने पहले जम्मू में हुई आतंकवादियों की घुसपैठ
सेना के सूत्रों के अनुसार, करीब दो महीने पहले इंटेलिजेंस को पाकिस्तान से बड़ी तादाद में आतंकियों ने घुसपैठ की है। इसके बाद से सेना ने तलाशी अभियान चला रखा है। कठुआ के एक तरफ पाकिस्तान का बॉर्डर है, तो दूसरी तरफ पंजाब और हिमाचल प्रदेश है। यह इलाका जम्मू-कश्मीर के उधमपुर, डोडा और सांबा जिलों से भी सटा हुआ है। बदनोटा गांव में जहां यह आतंकी हमला हुआ, वह कठुआ शहर से करीब 150 किलोमीटर दूरमाचेडी और लोहाई मल्हार के बीच पड़ता है। माचेडी में सेना का बेस कैंप भी था। अधिकारियों ने बताया कि पिछले दिनों हुए आतंकवादी हमले के बाद सैनिकों को उधमपुर जिले के बसंतगढ़ इलाके से सटे लोहाई मल्हार के ऊंचे इलाकों में तैनात किया जा रहा है। कठुआ में 11-12 जून को भी आतंकवादियों से मुठभेड़ हुई थी, जिसमें सैदा गांव में छिपे दो आतंकियों को सुरक्षा बलों ने ढेर कर दिया था। मारे गए आतंकी उधमपुर की ओर जा रहे थे।
ग्रामीणों के घर में अलग-अलग छिपते हैं आतंकी
बताया जाता है कि सेना की कार्रवाई के बाद अब कश्मीर टाइगर्स के आतंकवादियों ने अपनी रणनीति बदल दी है। वह अब समूहों में बंटकर सेना के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, मगर गांव में अपने छिपने के ठिकाने पर एक साथ नहीं रहते हैं। आतंकी स्थानीय ग्रामीणों के घर में रहते हैं और वारदात के बाद इलाका बदल देते हैं। सेना की दिक्कत यह है कि वह सर्च ऑपरेशन में ग्रामीणों के घर में बिना सटीक सूचना के तलाशी नहीं लेते हैं। सूत्र बताते हैं कि आतंकियों को लोकल लोगों का समर्थन हासिल है, जो उन्हें खाना और शेल्टर मुहैया कराते हैं। सोमवार को हुए हमले में एक लोकल गाइड ने सेना के मूवमेंट की जानकारी आतंकियों को दी थी। हमले के बाद कश्मीर टाइगर्स ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने 26 जून को तीन आतंकवादियों की मौत का बदला ले लिया है। बता दें कि 11 जून को देर रात आतंकवादियों ने डोडा जिले में सुरक्षाबलों पर हमला किया था, जिसमें पांच जवान जख्मी हो गए थे। इसके बाद सेना ने अभियान चलाकर तीन आतंकियों को मार गिराया था। सेना के अनुसार, कठुआ में सोमवार देर रात तक गोलीबारी जारी रही और घटनास्थल पर अतिरिक्त बल भेजा गया। इस अभियान में पैरा कमांडो के जवान शामिल होंगे।
