-फाइव स्टार की चकाचौंध में ज्वाइंट कमेटी की बैठक में अस्पताल की जमीनी समस्याओं का मुदृदा नहीं उठा पाईं प्रतिनिधि यूनियनें
भोपाल
महारत्न कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने अपने कर्मचारियों के लिए बनाए गए भेल कस्तूरबा अस्पताल की व्यवस्था अब भगवान भरोसे ही चल रही है। यहां के मेडिकल उपकरण वर्षों पुराने हैं तथा कई खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं करायी जा रही है. ऐसे में तो इसे बंद कर देना चाहिए. अस्पताल प्रबंधन की कुव्यवस्था के कारण प्राइवेट अस्पताल, नर्सिंग होम व जांच केंद्र फल-फूल रहे हैं.जो कि यह दुर्भाग्य की बात है।
कमजोर मैनेजमेंट की लापरवाही की वजह से कस्तूरबा अस्पताल की व्यवस्थाएं और भी ज्यादा लचर होती जा रही हैं। बुधवार को ट्रैक्शन मोटर्स ब्लॉक 9 में कार्यरत महिपाल कटारे जिनकी पिछले कुछ दिनों से तबियत खराब चल रही थी वे बुंधवार को हालत ज्यादा खराब होने पर कस्तूरबा अस्पताल गए। यूरिन इन्फेक्शन ज्यादा था सर्जिकल डॉक्टर्स मौजूद नहीं थे। कैथरेटर लगाने वाला कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था फिर उन्हें तुरन्त मेडिसिन डॉक्टर दीपमालिका द्वारा नोबल हॉस्पिटल रैफर किया जाता है लेकिन एम्बुलेंस में डीजल ना होने के कारण उन्हें इस इमरजेंसी में भी एम्बुलेंस के ड्राइवर द्वारा यह कहा गया कि ” डीजल नहीं है , भरवाकर आएंगे तब ले जायेंगें। तब हंगामा ज्यादा बढ़ने पर दूसरी उपलब्ध एम्बुलेंस द्वारा उन्हें नोबल अस्पताल भेजा गया। इमरजेंसी में भी अब कस्तूरबा अस्पताल के ये बदतर हालात कमजोर प्रबंधन नीति का ही परिणाम है। भेल कारखानें में कर्मचारी काम करता है और फैक्ट्री एक्ट के अंतर्गत बेहतर सुविधा देना कारखाना अधिनियम के अंतर्गत आता है लेकिन भेल का कस्तूरबा प्रबंधन मरीजो को अच्छी मेडिकल सुविधा तो दूर की बात है बल्कि खाना भी नहीं दे पा रहा है।
भेल प्रबंधन की चुप्पी सवालों के घेरे में… यूनियनों ने भी साधा मौन
भेल प्रबंधन बार-बार आश्वासन देने के बाद भी व्यवस्थाएं नहीं सुधर रही हैं। वहीं समय-समय पर भेल कर्मचारियों के मसीहा बनने वाली यूनियनों ने भी अस्पताल प्रबंधन की लचर व्यवस्थाओं को लेकर आवाज उठाना बंद कर दिया है। अभी हाल ही में जेसीएम की बैठक में भी किसी भी प्रतिनिधि यूनियन के कर्मचारियों के बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए बने कस्तूरबा अस्पताल की ही लापरवाही और अव्यवस्था को लेकर कार्पोरेट स्तर पर आवाज नहीं उठाई। श्रमिकों के हितों की बात करने वाली प्रतिनिधि यूनियनें भी फाइव स्टार होटल की चकाचौंध में मजदूरों के हितों की आवाज बुलंद करना भूल गई। जबकि अस्पताल की लचर व्यवस्था को लेकर कई बार श्रमिकों और उनके परिजनों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
