भोपाल।
मध्य प्रदेश में जर्जर भवनों की दीवार और छज्जा गिरने से दुर्घटनाओं के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। अब इसको लेकर प्रदेश सरकार गंभीर हुई है। उसी कडी में राजधानी में गोविंदपुरा विधायक और राज्यम़ंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने भी कडा रूख अख्तियार करते हुए इसको लेकर भोपाल के अधिकारियों की बैठक ली है। उन्होंने कहा कि जर्जर मकानों को चिन्हित कर इनके रहवासियों को पुनर्विस्थापित (आवास की वैकल्पिक व्यवस्था) किया जाये।
जर्जर मकानों को गिराने की कार्यवाही भी की जाये। राज्य मंत्री गौर ने एसडीएम रवि श्रीवास्तव से कहा कि वह अधिकारियों के दल के साथ गोविंदपुरा क्षेत्र की विभिन्न कॉलोनियों के पुराने मकानों का सर्वें कर जर्जर मकानों को चिन्हित करें। चिन्हाकन के बाद इन मकानों में रहने वाले रहवासियों को पुनर्विस्थापित कर जर्जर मकानों को तकनीकी परीक्षण के आधार पर गिराने की कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि वर्षा काल में जर्जर मकानों के क्षतिग्रत होने से होने वाले नुकसान की आशंका को ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई प्राथमिकता के साथ की जाये।
हर हाल में करें नियमों का पालन, नोटिस तक न रहें सीमित
श्रीमती यादव ने कहा है कि किसी भी प्रकार की जन धन हानि को रोकने के लिये यह आवश्यक है कि अधिनियम की धाराओं के अनुसार निरंतर कार्यवाही जारी रहे। आयुक्त ने नगरीय निकायों को सख्त हिदायत दी है कि जीर्ण शीर्ण भवनों के संबंध में केवल सूचना पत्र जारी नहीं करें बल्कि समुचित कार्यवाही करें। जर्जर हो चुके निजी या शासकीय भवनों को नोटिस दिये जाने की सूचना तथा उसकी सूची जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन को आवश्यक रूप से उपलब्ध कराई जाये।
भेल के जर्जर मकान भी बन सकते हैं मुसीबत
इधर भेल के अवासीय क्षेत्र में जर्जर हो रहे क्वार्टरों को लेकर एचएमएस के महामंंत्री ने बताया कि जेसीएम की बैठक् मेें टाउनशिप के जर्जर मकानों को लेकर सीमएडी के समक्ष अपनी बात रखी थी। सीएमडी मूर्ति ने यथोचित समाधान करने का आश्वासन भी दिया है। विगत दिनों कामरेड अमर सिंह ने प्रबंधन से गुहार लगाने पर आवासीय मकानों का रखरखाव का कार्य किया गया था।
