नई दिल्ली,
कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का विचार व्यावहारिक नहीं है और कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार स्थिति भांपने के लिए सिर्फ सियासी शिगूफे छोड़ रही है, लेकिन वह चुनिंदा सूचनाएं लीक करके कब तक टिकी रहेगी. विपक्षी दल का यह बयान उन खबरों के बाद आया है, जिनमें कहा गया है कि भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल के दौरान ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ लागू कर सकती है.
कांग्रेस ने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का कोई मसौदा प्रस्ताव नहीं है और सरकार ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से बात करने का कोई प्रयास नहीं किया है. सूत्रों ने रविवार को कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल के भीतर ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ लागू करेगी और उसे उम्मीद है कि चुनाव सुधार के इस बड़े मुद्दे पर सभी दलों का समर्थन मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरे होने से कुछ दिन पहले यह जानकारी सामने आई है.
मीडिया में खबरें प्लांट करा रही सरकार: कांग्रेस
एनडीए सरकार के मौजूदा कार्यकाल के दौरान ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ लागू होने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ‘आपने सरकारी सूत्रों का हवाला दिया, यहां मैं कांग्रेस पार्टी की आधिकारिक प्रवक्ता हूं जो मोदी सरकार की कई विफलताओं को उजागर कर रही हूं. चुनिंदा सूचनाएं लीक करके यह सरकार कब तक जीवित रहेगी? देश की वास्तविक समस्याओं से आंखें मूंदकर यह सरकार कब तक बची रहेगी. मीडिया में खबरें प्लांट कराकर यह सरकार कब तक बचेगी.’
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ‘वास्तविकता यह है कि वन नेशन वन इलेक्शन से जुड़ा कोई ड्राफ्ट नहीं आया है, कोई चर्चा नहीं हुई है, राज्य विधानसभाएं चल रही हैं, सरकार ने हमसे बात करने का कोई प्रयास नहीं किया है. ऐसा करना बिल्कुल व्यावहारिक नहीं है लेकिन सरकार को बातचीत करनी होगी. सूत्रों के हवाले से खबरें चलवाना, चुनिंदा सूचनाएं लीक करना, समाचार चैनलों में इसे चलाना, व्हाट्सएप के माध्यम से रिपोर्ट करना, यह बकवास बंद होनी चाहिए. लेकिन यही जारी है और इस सरकार के 100 दिनों में यही सब होता आ रहा है.’
‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ BJP का प्रमुख चुनावी वादा
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में किए गए प्रमुख वादों में से एक है. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाले एक उच्च-स्तरीय पैनल ने ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ के मुद्दे पर इस साल मार्च में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी. इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की गई है. इसके 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव कराए जाने का भी सुझाव रिपोर्ट में दिया गया है. इसके अलावा 22वें विधि आयोग ने भी एक रिपोर्ट सरकार को सौंपी है.
विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों (नगर पालिका और पंचायत) के लिए 2029 से एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की है. अगर किसी दल को बहुमत नहीं मिलता है, या सरकार अल्पमत में आ जाती है तो ऐसी स्थिति में मिलीजुली सरकार के गठन का प्रस्ताव विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में दिया है. वहीं, रामनाथ कोविंद समिति ने अपनी रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराने के लिए कोई समय सीमा नहीं निर्धारित की है. पैनल ने 18 संवैधानिक संशोधनों की सिफारिश की है, जिनमें से अधिकांश को राज्य विधानसभाओं के समर्थन की आवश्यकता नहीं होगी. हालाँकि, इसके लिए कुछ संविधान संशोधन विधेयकों की आवश्यकता होगी जिन्हें संसद से पारित कराना होगा.
