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मौत के हफ्तेभर बाद नसरल्लाह का जनाजा, ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के शामिल होने की अटकलें

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नई दिल्ली,

लेबनान में इजरायल के हमले में हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की मौत से ईरान भड़का हुआ है. नसरल्लाह की मौत का बदला लेने के लिए ईरान ने इजरायल पर निशाना साधते हुए 180 से ज्यादा मिसाइलें दागी. अब खबर है कि शुक्रवार को उनकी अंतिम यात्रा निकलने वाली है, जिसमें भारी भीड़ उमड़ने का अंदेशा है.

नसरल्लाह के जनाजे में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शामिल होने की अटकलें भी हैं. खामेनेई जुमे की नमाज में शामिल होंगे. इस वजह से कहा जा रहा है कि वह जुमे की नमाज से पहले नसरल्लाह के जनाजे में शामिल हो सकते हैं. लेकिन इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हो सकी है. साथ ही अभी तक यह भी पता नहीं चल पाया है कि नसरल्लाह का जनाजा कहां और कितने बजे निकाला जाएगा.

खामेनेई ने नसरल्लाह को ईरान आने की दी थी नसीहत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने लेबनान में इजरायली हमले से पहले नसरल्लाह को लेबनान से भाग जाने की चेतावनी दी थी. टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई ने 17 सितंबर के पेजर हमले के बाद नसरल्लाह को मैसेज भिजवाया था कि उन्हें (नसरल्लाह) अब ईरान आ जाना चाहिए. खामेनेई ने कहा था कि हिज्बुल्लाह के भीतर ही इजराइली एजेंट हैं और वह उन्हें मारने की योजना बना रहे हैं.

नसरल्लाह ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के टॉप कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अब्बास निलफोरुशन को हिजबुल्लाह चीफ को बेरूत जाकर यह मैसेज देने को कहा था. इजराइली हमले में उनकी भी मौत हो गई थी. वह उस वक्त नसरल्लाह के ही साथ था.

दम घुटने से हुई थी नसरल्लाह की मौत
हसन नसरल्लाह की मौत जहरीले धुएं की वजह से दम घुटने से हुई थी. वह बेरूत में हिज्बुल्लाह के सीक्रेट बंकर में छिपे हुए थे, जहां 27 सितंबर को इजरायल के हमले में उनकी मौत हो गई. इजरायल के चैनल 12 ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि इजरायली हमले में नसरल्लाह का सीक्रेट बंकर तबाह हो गया था, जिससे 64 साल के नसरल्लाह की जहरीले धुएं में दम घुटने से मौत हो गई.

रिपोर्ट में बताया गया था कि भारी विस्फोट की वजह से जहरीले धुएं के कारण बंकर के भीतर सांस लेना मुश्किल था. बता दें कि हसन नसरल्लाह जिस इमारत में था. उसके आसपास के ब्लॉक में इजरायल ने 80-85 बंकर बस्टर बम गिराए थे. बंकर बस्टर यानी जमीन की गहराई में बने अड्डों को खत्म करने वाले बम. ये सतह के काफी नीचे जाकर भी तबाही मचाते हैं.

नसरल्लाह जिस इमारत में था, वहां पर बम गिरने से 30 फीट गहरा गड्ढा हो गया था. जीबीयू-72 परिवार के बंकर बस्टर बम की खासियत यही होती है, कि ये स्टील, कॉन्क्रीट की मोटी दीवारों को तोड़कर 30 से 60 फीट की गहराई तक हमला कर सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटनास्थल से जब नसरल्लाह का शव बरामद किया गया तो उनके शव पर किसी तरह की बाहरी चोट के निशान नहीं थे. हिज्बुल्लाह ने अभी तक नसरल्लाह की मौत के कारणों पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

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