तेल अवीव,
इजरायल पर ईरान के भीषण हवाई हमले के पांच दिन बीत चुके हैं. इजरायली सेना ईरान पर एक बड़े हमले की तैयारी में है. आईडीएफ पूरी ताकत के साथ हमले की योजना बना रहा है, ताकि ईरान को अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाया जा सके. दूसरी तरफ ईरान भी संभावित पलटवार पर कड़ी प्रतिक्रिया की योजना बना रहा है. ईरानी सेना के सूत्रों के अनुसार यदि इजरायल कोई कठोर कदम उठाता है, तो उसे करारा जवाब मिलेगा.
इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सीरिया का दौरा किया है. वहां उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि उनके देश पर यदि इजरायल की ओर से हमला होता है, तो कड़ा जवाब दिया जाएगा. इस बार ऐसा पलटवार होगा कि इजरायल को बहुत ज्यादा पछताना होगा. अतीत में पहले भी ऐसा किया जा चुका है. इस बात को इजरायल को भूलना नहीं चाहिए.
सीरिया में ईरान के विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति बशर अल असद से मुलाकात की है. इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच लेबनान और गाजा में सीजफायर को लेकर बातचीत हुई. इसके साथ ही इजरायल-ईरान और सीरिया-इजरायल के बीच बढ़ते टकराव को लेकर भी चर्चा हुई. इस बातचीत के बाद ईरान के विदेश मंत्री ने बताया कि लेबनान और गाजा पट्टी में संघर्ष विराम के लिए बातचीत शुरू हो गई है.
इसमें शामिल देश एक समझौते पर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि इस बातचीत में कौन-कौन देश शामिल हैं. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, ”हम गाजा और लेबनान में युद्ध विराम के लिए प्रयास कर रहे हैं. युद्ध विराम की शर्तों को फिलिस्तीनी और लेबनानी पक्षों द्वारा स्वीकार किया जाना चाहिए. जब ऐसा होगा तो ईरान और सीरिया ऐसे कदम का समर्थन करेंगे. हम सकारात्मक परिणाम की उम्मीद करते हैं.”
उधर, लेबनान पर दो तरफा हमले जारी है. एक तरफ जमीनी ऑपरेशन को कई नए इलाकों में शुरू किया गया तो दूसरी तरफ बेरूत में जबरदस्त हवाई हमले किये गए. इजरायल ने गाजा पर भी दो बड़े हमले किए. पहला बड़ा हमला गाजा की एक मस्जिद पर किया गया, जिसमें 18 लोग मारे गए. इजरायल ने कहा कि वहां हमास के आतंकी छिपे हुए थे.
दूसरे ताजा हमले में इजरायली लड़ाकू विमानों ने फिलिस्तीन के एक शहर पर बम बरसाए हैं. इस ऑपरेशन में 12 हमास आतंकी ढेर किए गए. हिज्बुल्लाह से जुड़ी एक सुरंग को भी तबाह किया है. उत्तरी इजरायल के पास इस सुरंग का पता यदि इजरायल नहीं लगाता तो ये उसके लिए बड़ा खतरा बन सकती थी. इस सुरंग का अभी इस्तेमाल नहीं हुआ था, लेकिन इसमें हथियारों का जखीरा जमा कर लिया गया था. 7 अक्टूबर जैसे हमले की तैयारी चल रही थी.
