भेल भोपाल
भेल उद्योगनगरी में 65 वें वर्ष की विविध कला रामलीला के द्वितीय दिवस विश्वामित्र के आग्रह पर राजा दशरथ ने युवराज राम को उन्हें सौप दिया, युवराज राम ने शिवधनुष तोड़कर स्वयंबर में माता सीता के साथ विवाह किया, उसके जब (जगदीश गुप्ता)भगवान परशुराम को जब आराध्य के शिव धनुष तोड़ने की खबर लगती है उन्हे क्रोध आता है, तब लक्ष्मण जी और परशुराम के बीच तीखी बहस संवाद होता है, निर्देशक लोकेश मौर्य के निर्देशन में प्रतिवर्ष नए नए प्रयोग से रामलीला को आकर्षक तैयार किया जाता है, रावण (हिम्मत राव पाटिल) ने भी स्वयंवर में भाग लिया,पूर्व महासचिव शिवप्रसाद साहू (दशरथ ), कृष परिहार(विश्वामित्र) , राजीव आर्य(जनक), लक्ष्मण का किरदार मयंक सिंह ने निभाया, प्रचार सच्ची योगेश सराठे ने बताया की शुरुआत में ट्रेनीज श्री टी एन गंजू, रामाधार प्रसाद द्वारा पहले कृष्ण जन्माष्टमी का ड्रामा किया गया, 1960 में जब पहली बार रामलीला हुई तब हॉस्टल से लकड़ी के पलंग का स्टेज और तिरपाल लगाकर रामलीला प्रारंभ हुई। सभी कर्मचारी दिन में स्क्रिप्ट तैयार कर शाम को रामलीला शो करते थे, टेंट में मेकअप होता था। रात्रि में हॉस्टल बंद हो जाने से कलाकारों का खाना भी वही बनाते थे खाते थे और वही सो भी जाया करते थे, पहली बार दशहरा का आयोजन पूर्व कार्यपालक महोदय पद्मनाभन द्वारा प्रारंभ कराया गया। धीरे—धीरे स्टेज फिर कमरे एक एक कर बनाए गए। आज भी फाउंडर मेंबर श्यामसुंदर हमारे साथ हैं। के एस चंद्रवंशी(रूप सज्जा निर्देशक) द्वारा बहुत सुंदर प्रतिरूप तैयार किए जाते हैं। समिति के महासचिव आरएस अरोरा और उपाध्यक्ष सुरेश सोनपुरे ने बताया की रामलीला पूर्व की तैयारियां एक माह पूर्व से जोर शोर से आरंभ हो जाती है तब जाकर इतना मनोरंजक रामलीला कर पाते है। जहां तक भोपाल शहर की सबसे पुरानी रामलीला होने का गौरव विविधकला विकास समिति पिपलानी को प्राप्त है।
