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पेट्रोल से आटा तक सब हो जाएगा सस्‍ता… चीन की रफ्तार पड़ती गई सुस्‍त तो भारत को फायदा कैसे?

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नई दिल्‍ली

अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल (क्रूड) की कीमतों में काफी मूवमेंट है। दाम तेजी से ऊपर-नीचे जा रहे हैं। आशंका थी कि ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के चलते क्रूड उछलेगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। इजरायल ने ईरान की तेल सुविधाओं पर हमला नहीं करने का फैसला किया है। हालांकि, चीन जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से मांग में कमजोरी के कारण भी क्रूड की कीमतों पर दबाव है। प्रोबिस सिक्योरिटीज के सीआईओ जोनाथन बैराट ने इकनॉमिक टाइम्‍स को इंटरव्‍यू में कहा है कि चीन और वहां से मिल रहे कुछ कमजोर आंकड़ों के चलते तेल की कीमत घट रही है। चीन की आर्थिक रफ्तार में सुस्‍ती का सीधा फायदा भारत को होगा। समझते हैं कैसे?

घटेंगे चीजों के दाम
दरअसल, चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है। उसकी मांग में कमी से क्रूड की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को बड़ा फायदा होगा। कम तेल की कीमतों का सीधा असर पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर पड़ता है। इससे महंगाई कम हो सकती है। इसका सीधा मतलब है आम लोगों को राहत। पेट्रोल और डीजल की कीमतों के घटने से ज्‍यादातर चीजों के दाम कम हो जाएंगे।

चीन की अर्थव्यवस्था की सुस्ती से ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन में बदलाव आ सकता है। कंपनियां चीन से अपना उत्पादन अन्य देशों में ट्रांसफर कर सकती हैं। भारत के पास बड़ी जनसंख्या, युवा श्रम बल और आकर्षक निवेश नीतियों के कारण यह एक आकर्षक विकल्प बन सकता है। इससे भारत में मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सेक्‍टर को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

विदेशी निवेश में बढ़ोतरी
चीन से निवेशक अन्य देशों में निवेश के नए अवसर तलाश रहे हैं। भारत के पास बड़ा बाजार और ग्रोथ की ऊंची दर का फायदा है। यह विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर सकती है। विदेशी निवेश से भारत में पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा। इससे बुनियादी ढांचे के विकास और नई तकनीकों को अपनाने में मदद मिलेगी।

‘मेक इन इंडिया’ पहल को मिलेगा बल
चीन की अर्थव्यवस्था की सुस्ती से भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बल मिल सकता है। घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और निर्यात को बढ़ाने के लिए सरकार अलग-अलग प्रोत्साहन दे रही है। चीन से उत्पादन का ट्रांसफर इस पहल को सफल बनाने में मदद कर सकता है।

हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि चीन की अर्थव्यवस्था की सुस्ती से भारत को होने वाले फायदे कुछ चुनौतियों के साथ भी जुड़े हुए हैं। चीन की अर्थव्यवस्था की सुस्ती वैश्विक मंदी का कारण बन सकती है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा भारत को अन्य देशों जैसे वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी। ये मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में में निवेश आकर्षित करने के लिए भारत जितना ही प्रयास कर रहे हैं।

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