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कनाडा में हिंदू-सिखों में दरार पैदा करने में लगे हैं खालिस्तानी… भारतीय मूल के स‍िख राजनेता का दावा- भारत भी निशाने पर

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ओटावा

कनाडा के ब्रैम्पटन में मंदिर में हुई हिंसा के मामले में पूर्व कनाडाई सांसद और मंत्री उज्जवल देव दोसांझ बड़ा दावा किया है। दोसांझ का कहना है कि कनाडा में खालिस्तानी हिंदुओं और सिखों में फूट डालने के प्लान पर काम कर रहे हैं। उनकी ये कोशिश सिर्फ कनाडा ही नहीं बल्कि भारत के लिए भी है। खालिस्तानी चाहते हैं कि हिंदू-सिखों में यह विभाजन भारत में भी फैल जाए। 77 साल के कनाडाई राजनेता दोसांझ ने एनडीटीवी से बातचीत में ये दावा किया है।

पंजाब के जालंधर में जन्मे और कनाडा में लंबे समय से सक्रिय उज्जल देव दोसांझ ने ब्रैम्पटन मंदिर की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा, ‘खालिस्तानी हिंसा लंबे समय से कनाडा में एक मुद्दा रही है। यह कुछ समय के लिए शांत हो गई थी लेकिन मौजूदा सरकार में यह फिर से भयानक रूप में सामने आई है। खालिस्तानियों की हिंसा पर सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने कम ध्यान दिया और आज ये हिंसा हिंदू मंदिरों तक पहुंच गई है। साफ है कि खालिस्तानियों का मकसद सिखों और हिंदुओं के बीच दरार पैदा करना है क्योंकि उनका आखिरी लक्ष्य भारत को बांटना है।’

‘राजनीतिक वर्ग को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत’
दोसांझ ने कहा कि कनाडा का राजनीतिक वर्ग इन मुद्दों पर सो रहा है। मौजूदा हिंसा में भी बड़े नेताओं की ओर से की गई निंदा में भी खालिस्तानियों का जिक्र नहीं है, ऐसा लगता है कि जानबूझकर खालिस्तानियों का नाम लेने से कनाडाई नेता बच रहे हैं। उन्होंने जस्टिन ट्रूडो को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि उनको पता है कि क्या हो रहा है, खालिस्तानी उनके मंत्रिमंडल में थे, वो अच्छे से जानते हैं कि ये लोग क्या कर रहे हैं।

दोसांझ ने कहा कि सिर्फ सरकार ही नहीं कनाडा में विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी भी यही कर रही है। कनाडा में कोई भी मुख्यधारा का राजनीतिक व्यक्ति नहीं है जो खड़ा होकर कह सके कि खालिस्तानी नफरत इस देश में नहीं चलेगी। शायद वोटों की राजनीति की वजह से राजनेता ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती खालिस्तानी हिंसा ने उदारवादी सिख समुदाय में भी डर पैदा किया है।

लिबरल पार्टी के सांसद और कनाडा के स्वास्थ्य मंत्री रहे दोसांझ ने बताया कि हिंदू और सिख दोनों समुदायों के लोग उस कॉन्सुलर कैंप में गए थे, जिसे भीड़ ने निशाना बनाया। ये कॉन्सुलर अधिकारी केवल हिंदुओं की मदद करने के लिए नहीं थे, वे सभी भारतीयों की मदद कर रहे थे। ऐसे में इस हिंसा को किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता है।

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