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मोदी सरकार में मिडल क्लास पर इनकम टैक्स का बोझ घटा, अमीरों की देनदारी बढ़ी

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नई दिल्ली:

मोदी सरकार के 10 वर्षों में 20 लाख रुपये सालाना से कम कमाने वालों पर टैक्स का बोझ घटा है। वहीं, 50 लाख रुपये सालाना से अधिक कमाई करने वालों की टैक्स देनदारी काफी बढ़ी है। फाइनैंस मिनिस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि मोदी शासन में मिडल क्लास पर ज्यादा टैक्स लगने की बात सही नहीं है।

अधिकारी के मुताबिक, 50 लाख रुपये से अधिक कमाई वालों की ओर से रिटर्न फाइलिंग मोदी शासन में लगभग 5 गुना बढ़ी है। वित्त वर्ष 2014 में ऐसे 1.85 लाख रिटर्न फाइल हुए थे। 2024 में 9.39 लाख रिटर्न फाइल हुए। उन्होंने कहा कि ‘टैक्स चोरी और ब्लैक मनी के खिलाफ मोदी सरकार की सख्ती के चलते 50 लाख रुपये से अधिक इनकम वालों की ओर से ITR फाइलिंग बढ़ गई है।’

पर्सनल और कॉरपोरेट टैक्स
ऐसे लोगों की इनकम टैक्स देनदारी 2014 में कुल 2.52 लाख करोड़ रुपये थी, जो 2024 में 3.2 गुना बढ़कर 9.62 लाख करोड़ रुपये हो गई। अधिकारी ने कहा कि 2024 में जो इनकम टैक्स कलेक्ट किया गया, उसमें 76 प्रतिशत हिस्सा 50 लाख रुपये से अधिक कमाई वालों का था। इस बढ़ोतरी के चलते ’20 लाख रुपये तक सालाना कमाई वाले मिडल क्लास पर टैक्स का बोझ घट गया।’

उन्होंने पर्सनल इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स में अंतर साफ करते हुए कहा कि पर्सनल इनकम टैक्स का मतलब यह नहीं है कि यह केवल इंडिविजुअल्स पर लगता है। पर्सनल इनकम टैक्स दरअसल नॉन-कॉरपोरेट टैक्स है।

क्यों बढ़ी जीरो फाइलिंग
अधिकारी के मुताबिक, एग्जेम्पशन लिमिट बढ़ने से जीरो इनकम टैक्स फाइलिंग बढ़ी हैं। वित्त वर्ष 2014 में 2 लाख रुपये से अधिक कमाने वाले सभी लोगों को टैक्स चुकाना होता था, लेकिन 2024 में एग्जेम्पशन लिमिट 7 लाख कर दी गई। वित्त वर्ष 2014 में 10 लाख रुपये से कम आमदनी वाले करदाताओं से इनकम टैक्स कलेक्शन का हिस्सा कुल टैक्स में 10.17% था, जो 2024 में घटकर 6.22% पर आ गया।

2014 में ढाई से 7 लाख रुपये तक कमाने वालों की असल इनकम टैक्स देनदारी 25000 रुपये थी, जबकि मोदी शासन में 7 लाख रुपये तक कमाने वालों को कोई इनकम टैक्स नहीं देना होता है। अधिकारी ने कहा कि 7 से 10 लाख रुपये तक की आमदनी वालों की इनकम टैक्स देनदारी 2024 में औसतन 43000 रुपये थी, जो उनकी इनकम के 4-5 प्रतिशत के बराबर थी।

कैसे हुआ फायदा
अधिकारी ने कहा कि 10 साल की अवधि में इंफ्लेशन का असर एडजस्ट करने के बाद 10 से 20 लाख रुपये तक की कमाई वालों के लिए टैक्स देनदारी 60% घटी है। 2014 में 10 से 15 लाख रुपये तक कमाने वालों ने औसतन 2.3 लाख रुपये का टैक्स दिया, वहीं 2024 में 1.1 लाख रुपये की टैक्स देनदारी बनी। 15 से 20 लाख रुपये तक कमाने वालों की औसत टैक्स देनदारी 2014 में 4.1 लाख रुपये और 2024 में 1.7 लाख रुपये रही।

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