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क्‍या पुराने रेल पुलों को कबाड़ में बेचने का प्‍लान? सरकार ने दिया है जवाब

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नई दिल्‍ली

सरकार ने पुराने रेल पुलों को कबाड़ में बेचने की खबरों को नकारा है। रेल मंत्री ने बताया कि पुलों के अनुपयोगी हिस्सों को स्क्रैप के रूप में निपटाया जाता है। कुछ मामलों में राज्य सरकारों को पर्यटन के लिए पुराने पुल सौंपे जाते हैं। आंध्र प्रदेश में गोदावरी पुल और उत्तर प्रदेश में कर्जन पुल इसके उदाहरण हैं।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा में बताया कि पुराने रेल पुलों को कबाड़ में बेचने का कोई फैसला नहीं हुआ है। यह जानकारी उन्होंने एक लिखित जवाब में दी। हालांकि, बेकार पड़े पुलों के इस्तेमाल न हो सकने वाले हिस्सों, जैसे स्टील गर्डर को कबाड़ के रूप में बेचा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि बेकार सामान से कुछ पैसा मिल सके। कभी-कभी पुराने रेल पुलों को राज्य सरकारों को भी दे दिया जाता है। यह तब होता है जब राज्य सरकारें पर्यटन या किसी और काम के लिए इन पुलों का इस्तेमाल करना चाहती हैं।

रेल मंत्री से क्‍या क‍िया गया था सवाल?
इस तरह अश्विनी वैष्‍णव ने पुराने रेल पुलों को कबाड़ में बेचने की खबरों को खारिज कर दिया। दरअसल, यह सवाल उठाया गया था कि क्या सरकार देश के अलग-अलग हिस्सों में पुराने रेल पुलों को कबाड़ के रूप में बेचने की योजना बना रही है?

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ पुलों के बेकार हिस्सों को ही स्क्रैप के तौर पर बेचा जाता है। रेले मंत्री बोले, ‘जी नहीं, बहरहाल पुलों के अनुपयोगी हिस्सों जैसे स्टील गर्डर आदि को स्क्रैप के रूप में निपटाया जाता है ताकि सामग्री का मूल्य प्राप्त किया जा सके।’ उन्होंने बताया कि ऐसा करके सरकार बेकार पड़े सामान से कुछ पैसा कमा लेती है।

अश्‍व‍िनी वैष्‍णव ने द‍िया इनका उदाहरण
कई बार पुराने रेल पुलों का दूसरा इस्तेमाल भी ढूंढा जाता है। अगर कोई राज्य सरकार इन पुलों को पर्यटन या किसी और काम के लिए मांगती है, तो उन्हें दे दिया जाता है। मंत्री ने इसके दो उदाहरण भी दिए। आंध्र प्रदेश में गोदावरी पुल और उत्तर प्रदेश में कर्जन पुल, दोनों को राज्य सरकारों को सौंप दिया गया है।

रेल मंत्री ने कहा, ‘कुछ मामलों में बेकार छोड़े जा चुके रेलवे पुलों को राज्य सरकार के अनुरोध पर पर्यटन आदि के लिए उपयोग करने के उद्देश्य से संबंधित राज्य सरकार को सौंप दिया जाता है।’ उन्होंने इस क्रम में आंध्र प्रदेश में गोदावरी पुल और उत्तर प्रदेश में कर्जन पुल का उदाहरण दिया। इससे पता चलता है कि सरकार पुराने ढांचों का सही इस्तेमाल करने की कोशिश करती है।

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