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Friday, June 19, 2026
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टिकट की चाह… कांग्रेस और बीजेपी के पूर्व विधायकों की AAP में लगातार एंट्री, क्या है केजरीवाल का नया दांव?

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नई दिल्ली

दिल्ली में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले दिल्ली का सियासी पारा हाई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार आम आदमी प्रमुख (AAP) अरविंद केजरीवाल विरोधियों को मात देने के लिए नया दांव चलने वाले हैं। सूत्रों का कहना है किदिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी कई पुराने कांग्रेस और बीजेपी नेताओं को टिकट दे सकती है।

ये नेता पहले कांग्रेस या बीजेपी से चुनाव लड़ चुके हैं। AAP मौजूदा विधायकों को बदलकर नए चेहरों को मौका दे सकती है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि सत्ता विरोधी लहर का असर कम हो। पार्टी का मानना है कि इन पुराने नेताओं के आने से AAP की स्थिति और मजबूत होगी। ये नेता अपने साथ अनुभव और समर्थक भी लाएंगे।

AAP ने 3 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे
AAP ने पिछले महीने अपनी पहली उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। इस सूची में 6 ऐसे उम्मीदवार थे जो पहले बीजेपी और कांग्रेस में थे। पार्टी ने पहले ही 3 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं। विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल और तिमारपुर विधायक दिलीप पांडे ने भी चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया है। उनके ऐलान के कुछ घंटों बाद ही AAP ने इन सीटों पर पहले चुनाव लड़ चुके नेताओं को पार्टी में शामिल कर लिया। इससे साफ है कि इन्हें टिकट मिल सकता है।

आप को जीत दिला पाएंगे ये नेता?
कांग्रेस से वीर सिंह धींगान और सुमेश शौकीन, और बीजेपी से ब्रह्म सिंह तंवर, सुरेंद्र पाल सिंह बिट्टू और अनिल झा जैसे नेता हाल ही में AAP में शामिल हुए हैं। धींगान 1998, 2003 और 2008 में सीमापुरी से लगातार विधायक रहे। बिट्टू ने 2003 और 2008 में तिमारपुर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था, बाद में वो बीजेपी में शामिल हो गए। सुमेश 2008 में मटियाला से विधायक चुने गए थे। झा ने 2008 और 2013 में किराड़ी से चुनाव जीता। तंवर 2013 में छतरपुर से विधायक बने थे। 2013 में AAP के शानदार प्रदर्शन, 2015 और 2020 में मिली भारी जीत के कारण, ये उम्मीदवार हार का सामना कर रहे थे। AAP ने 2013 में 70 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीटें जीती थीं। 2015 और 2020 में पार्टी ने क्रमशः 67 और 62 सीटें जीतीं।

मौजूदा विधायकों को बदलना क्यों जरूरी?
AAP के एक वरिष्ठ नेता ने माना कि सरकार और विधायकों दोनों के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर है। इससे निपटने का एक तरीका मौजूदा विधायकों को बदलना है। 2020 में, AAP ने लगभग 16 विधानसभा क्षेत्रों में मौजूदा विधायकों को बदल दिया था। पार्टी नेता ने कहा कि इस बार यह संख्या बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकर्ताओं और नगरपालिका पार्षदों के अलावा, AAP उन उम्मीदवारों पर भी विचार कर रही है जिन्हें अन्य दो दलों ने मैदान में उतारा था और जिन्होंने AAP के उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दी थी और दूसरे नंबर पर रहे थे।

‘ऐसे उम्मीदवारों का अपना वोट बैंक होता है’
पार्टी के एक नेता ने कहा, ‘ऐसे उम्मीदवारों का अपना कुछ हजार वोटों का वोट बैंक होता है। वे चाहे किसी भी पार्टी से चुनाव लड़ें, उनके पास अपने निश्चित वोट होते हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमने पूरे शहर में जो सर्वेक्षण किए हैं, उनसे पता चलता है कि AAP अभी भी लोकप्रिय है और लोग अरविंद केजरीवाल को वापस चाहते हैं, लेकिन कई सीटों पर वे विधायक से नाखुश हैं। विधायक को किसी अन्य स्थानीय प्रतिष्ठित उम्मीदवार से बदलकर, हम स्थिति को सुधार सकते हैं।’ अब तक, जिन विधायकों के टिकट काटे गए हैं, उन्होंने पार्टी के फैसलों का खुले तौर पर विरोध नहीं किया है।

नई रणनीति के साथ आगे बढ़ रही AAP
AAP दिल्ली में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। पुराने और अनुभवी नेताओं को शामिल करना इसी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी को उम्मीद है कि इन नेताओं का अनुभव और जनाधार AAP को जीत दिलाने में मददगार साबित होगा। साथ ही, मौजूदा विधायकों को बदलकर पार्टी सत्ता विरोधी लहर से भी निपटने की कोशिश कर रही है। देखना होगा कि जनता AAP की इस रणनीति को किस तरह से लेती है और चुनाव परिणाम क्या होते हैं।

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