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Thursday, June 4, 2026
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दिल्ली में 142 दिन CM रहीं आतिशी का क्या होगा? अपनी सीट बचाने के बाद AAP में बढ़ा कद

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नई दिल्ली,

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार के बाद मुख्यमंत्री आतिशी ने 142 दिन बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया. पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के जेल जाने पर आतिशी को सितंबर में मुख्यमंत्री बनाया गया था और चुनाव में मिली हार के बाद रविवार को उन्होंने उपराज्यपाल वीके सक्सेना को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. हालांकि नई सरकार के गठन तक वह कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर काम करती रहेंगी. सबसे बड़ी बात है कि इस चुनाव में आतिशी AAP के उन गिने-चुने बड़े नेताओं में शामिल हैं जो बीजेपी की आंधी में अपनी सीट बचाने में सफल रहे हैं.

खुद को बताया था अस्थाई सीएम
आतिशी को जब दिल्ली का सीएम बनाया गया था वह तब भावुक थीं. 21 सितंबर 2024 की शाम को उन्होंने शपथ लेने के बाद कहा था कि मैंने आज CM के तौर पर शपथ ग्रहण जरूर की है, लेकिन ये मेरे और हम सब के लिए भावुक क्षण है कि अरविंद केजरीवाल सीएम नहीं हैं. इस पूरे कार्यकाल में आतिशी ने खुद को अस्थाई सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट किया. यहां तक कि सीएम कार्यालय में भी एक कुर्सी केजरीवाल के लिए खाली रखकर पदभार संभाला था. केजरीवाल ने भी चुनाव प्रचार के दौरान साफ किया था कि दिल्ली में अगर AAP की सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री वह खुद बनेंगे. आतिशी भी इस बात पर लगातार मुहर लगाती रहीं ताकि जनता के बीच साफ संदेश जाए.

नेता विपक्ष की मिलेगी जिम्मेदारी?
नतीजों के बाद हवा ने फिर कुछ उसी तरह का रुख लिया है. केजरीवाल अब चुनाव हार चुके हैं और आतिशी ने अपनी सीट बचा ली है. वह कालकाजी से जीतने के बाद भी उस तरह से जश्न नहीं मान पाईं क्योंकि उनकी पार्टी के साथ-साथ AAP के ज्यादातर टॉप लीडर्स को चुनाव में हार मिली है. अब दिल्ली विधानसभा में आतिशी के अलावा गोपाल राय और इमरान हुसैन ही AAP के ऐसे वरिष्ठ नेता हैं जो नेता विपक्ष का पद संभाल सकते हैं. आतिशी मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं और लगातार बीजेपी पर हमलावर रही हैं, इस लिहाज से नेता विपक्ष के पद लिए उनकी दावेदारी ज्यादा मजबूत मानी जा रही है. महिला चेहरा होने के साथ-साथ वह पार्टी प्रवक्ता के तौर पर भी वह पूर्व में अहम भूमिका निभा चुकी हैं.

जीत के बाद AAP में बढ़ा कद
दूसरी अहम बात ये है कि अरविंद केजरीवाल के अलावा मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, सत्येंद्र जैन और सोमनाथ भारती जैसे AAP के वरिष्ठ नेताओं को चुनाव में हार मिली है. ऐसे में जो नेता इस चुनाव में अपनी सीट बचा पाए हैं उनका कद भी पार्टी के भीतर बढ़ जाएगा, आतिशी उनमें सबसे बड़ा नाम हैं. जब वह सीएम थीं तब केजरीवाल के विकल्प के तौर पर काम कर रही थीं. लेकिन इस बार केजरीवाल-सिसोदिया समेत AAP के बड़े नेता चुनाव जीतकर विधानसभा नहीं पहुंचे हैं और आतिशी की जिम्मेदारी अब ज्यादा बढ़ जाएगी. दिल्ली की आगामी सरकार के फैसलों को लागू कराने में विपक्षी नेता के तौर पर उनके कंधों पर अहम जिम्मेदारी आने वाली है.

‘बीजेपी को जवाबदेह बनाएंगे’
दिल्ली चुनाव में आतिशी की जीत उनके लिए बड़ा मौका भी साबित हो सकती है क्योंकि अब वह राजधानी में पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर AAP का सबसे बड़ा चेहरा बन गई हैं जिसे इस चुनाव में जीत मिली है. केजरीवाल के साथ नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक के बाद इस बात के साफ संकेत भी मिल गए हैं कि दिल्ली में अब आतिशी ही AAP का सबसे बड़ा चेहरा हैं. उन्होंने मीटिंग के बाद कहा कि केजरीवाल ने सभी विधायकों को अपने क्षेत्र में काम करने के निर्देश दिए हैं और विपक्ष के तौर पर हमारी जिम्मेदारी है कि हम बीजेपी की आने वाली सरकार को जवाबदेह बनाएं ताकि जनता से किए गए वादों को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके.

आतिशी ने कहा कि दिल्ली की महिलाओं को आर्थिक मदद के अलावा सभी वेलफेयर स्कीम को लागू कराने में आम आदमी पार्टी विपक्ष के तौर पर अपनी भूमिका निभाएगी. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने इस बार गुंडागर्दी से चुनाव जीता है लेकिन हम दिल्ली के जनादेश को स्वीकार करते हैं और हार को लेकर पार्टी के भीतर मंथन जारी है.

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