भेल न्यूज।
तीन हजार से अधिक कर्मचारी- विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) और कॉरपोरेट्स के कर्मचारियों ने अपने आयकर रिटर्न (आईटीआर) में धोखाधड़ी वाले दावे किए हैं और आयकर की चोरी करके भारी रिफंड प्राप्त किया है। सूत्रों के मुताबिक जिन पीएसयू के कर्मचारियों ने बेईमान कर अधिकारियों की मिलीभगत से कर धोखाधड़ी में लिप्त हैं, उनमें भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, आयुध निर्माणी तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु विद्युत बोर्ड, तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम, तिरुनेलवेली हेवी अलॉय पेनेट्रेटर परियोजना और कई अन्य शामिल हैं। कई निजी कंपनियों के कर्मचारी भी कर धोखाधड़ी में लिप्त बताए जा रहे हैं।
आयकर विभाग, तमिलनाडु और पुडुचेरी की जांच शाखा द्वारा की गई जासूसी में आयकर व्यवसायियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट, बिचौलियों और कर्मचारियों से जुड़े कई रैकेट का भंडाफोड़ किया गया है। तमिलनाडु और पड़ोसी राज्यों की सीमा से लगे जिलों में आयकर धिकारियों द्वारा की गई प्रवर्तन कार्रवाइयों के दौरान, यह पाया गया कि आयकर व्यवसायी और सीए ने कुछ मध्यस्थ डायरियों के साथ मिलकर फर्जी दान रसीदें, झूठे चिकित्सा व्यय दावे, फर्जी किराया समझौते और गलत छूट भत्ते तैयार करके कर धोखाधड़ी को बढ़ावा दिया।
सैकड़ों कर्मचारियों ने राजनीतिक दलों के नाम पर फर्जी रसीदों के माध्यम से धारा 80 जीजीसी के तहत फर्जी कटौती का दावा किया है। कई कर्मचारियों ने धारा 80ई के तहत कई लाख की कटौती का दावा किया है, जो स्वयं या आश्रितों के लिए उच्च शिक्षा के लिए लिए गए ऋण पर दिए गए ब्याज के लिए है। जांच के दौरान पाया गया कि ये फर्जी दावे थे।
बताया जा रहा है कि कर सलाहकारों ने मकान मालिकों के नाम पर फर्जी किराया रसीदें तैयार कीं, ताकि मकान किराया भत्ते में छूट का दावा किया जा सके और कर चोरी के लिए कर्मचारियों को दी जा सकें। जांच अधिकारियों ने कर चिकित्सकों के कंप्यूटर सिस्टम में विभिन्न डॉक्टरों के नाम पर मेडिकल सर्टिफिकेट और बिल बनाने के स्पष्ट सबूत पाए हैं।
