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चीन की तारीफ में छुपी है चेतावनी… अलग लेवल पर खेल रहा है ड्रैगन, एक्‍सपर्ट ने भारत को दी सतर्क रहने की सलाह

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नई दिल्‍ली:

गुरुग्राम के विश्लेषक सिद्धार्थ ओझा ने चीन की कूटनीति पर कई दिलचस्प बातें बताई हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी आपकी तारीफ करता है तो यह आपकी सफलता से ज्यादा उसकी रणनीति के बारे में बताता है। हाल ही में चीनी सरकार के समर्थन वाले ग्लोबल टाइम्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत-चीन संबंधों पर की गई टिप्पणी को ‘व्यावहारिक नजरिया’ बताया था। ओझा ने इस तारीफ के पीछे छिपे चीन के इरादों को उजागर किया है। उन्होंने ल‍िंक्‍डइन पर बताया कि चीन की तारीफ में अक्सर एक चेतावनी छिपी होती है।

ओझा के अनुसार, चीन की तारीफ के पीछे तीन मुख्य कारण हो सकते हैं। पहला, चीन मानता है कि जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) अब सीएनपी (समग्र राष्ट्रीय शक्ति) के युग में पुरानी हो चुकी है। दूसरा, चीन रणनीतिक चालों के जरिये तारीफ का इस्तेमाल हथियार के रूप में कर सकता है। तीसरा, चीन को अपनी श्रेष्ठता पर पूरा भरोसा है, जो कि अहंकार से भरा हुआ है और जल्द ही टूट सकता है।

पीएम मोदी ने क्‍या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ बातचीत में भारत और चीन के बीच ‘स्वस्थ और स्वाभाविक’ प्रतिस्पर्धा की बात की थी। उन्होंने 2020 के सीमा विवाद को स्वीकार करते हुए कहा था, ‘राष्ट्रपति शी के साथ मेरी मुलाकात के बाद हमने सीमा पर सामान्य स्थिति देखी है। हम 2020 से पहले की स्थितियों को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं।’

ओझा ने लिखा, ‘वैश्विक शक्ति के खेल में चीन की कूटनीतिक प्रशंसा अक्सर छिपाने से ज्यादा प्रकट करती है।’ उनका मानना है कि चीन का ध्यान अब डॉलर-आधारित जीडीपी की तुलना से हटकर नियंत्रण और शक्ति के गहरे स्तरों पर चला गया है। ओझा ने कहा, ‘डॉलर में GDP? यह भोले लोगों के लिए एक भ्रम है।’ उन्होंने बताया कि चीन अब एक अलग ही स्तर पर खेल रहा है।

चीन का औद्योगिक पैमाना बहुत बड़ा
विश्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए ओझा ने बताया कि 2020 में चीन की जीडीपी क्रय शक्ति समानता (PPP) के मामले में 27.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। यह अमेरिका के 21.4 ट्रिलियन डॉलर से काफी आगे है। इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि चीन तकनीकी संप्रभुता पर जोर दे रहा है. विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) के अनुसार, 2020 में चीन ने 15 लाख से अधिक पेटेंट आवेदन दाखिल किए, जो AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), क्वांटम कंप्यूटिंग और 5G जैसे इनोवेशन क्षेत्रों में अपना दबदबा बनाने की स्पष्ट मंशा दिखाता है।

चीन का औद्योगिक पैमाना भी बहुत बड़ा है। वह अब दुनिया के 50% से अधिक स्टील का उत्पादन करता है। सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में ताइवान से आगे निकलने की दौड़ में है। इसके अलावा, चीन ने दुर्लभ पृथ्वी खनिजों (जहां चीन का 80% उत्पादन पर नियंत्रण है) से लेकर हुआवे की 5G पहुंच के नेतृत्व वाले डिजिटल बुनियादी ढांचे तक वैश्विक निर्भरता के माध्यम से भी काफी प्रभाव बनाया है।

कुल मिलाकर चीन की तारीफ को सावधानी से देखना चाहिए। यह तारीफ अक्सर उनकी रणनीतिक चाल का हिस्सा होती है, जिसका उद्देश्य अपनी शक्ति को बढ़ाना और दूसरों को भ्रमित करना होता है। भारत को चीन की इन चालों से सावधान रहना चाहिए और अपनी ताकत को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

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