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वक्फ कानून पर SC ने केंद्र को दी 7 दिन की मोहलत, डिनोटिफाई और नई नियुक्तियों पर तब तक रहेगी रोक

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नई दिल्ली

वक्फ कानून को लेकर गुरुवार को दूसरे दिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट से जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को 7 दिन का वक्त दिया। वहीं शीर्ष कोर्ट ने कहा कि फिलहाल इस कानून को लेकर पहले जैसी स्थिति बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक वक्फ बोर्ड में कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। केंद्र सरकार का जवाब आने तक वक्फ की संपत्ति पहले जैसी बनी रहेगी। अगली सुनवाई तक कलेक्टर वक्फ संपत्ति को लेकर कोई आदेश जारी नहीं करेंगे।

चीफ जस्टिस ने कहा कि अगली सुनवाई तक बोर्ड या काउंसिल की नियुक्ति नहीं हो सकती, और अगर 1995 के अधिनियम के तहत पंजीकरण हुआ है तो उन संपत्तियों को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। हम कह रहे हैं कि कार्यपालिका निर्णय लेती है और न्यायपालिका निर्णय लेती है।

केंद्र को 7 दिन में जवाब देने का वक्त मिला
CJI ने कुछ खास लोगों को 2013 के कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने की इजाजत दी है। यह एक विशेष मामला है। CJI ने कहा, ‘याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने की अनुमति है।’ केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और वक्फ बोर्ड भी 7 दिनों के अंदर अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं। सभी को जल्द से जल्द जवाब देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार के जवाब के बाद याचिकाकर्ता सिर्फ 5 याचिकाएं ही दें।

सुनवाई में कोर्ट ने कुछ अहम बातें कहींहैं। कोर्ट ने कहा है कि वह तीन मुद्दों पर अंतरिम आदेश जारी करेगा। इसका मतलब है कि कोर्ट अभी कुछ समय के लिए ये नियम लागू करेगा।

1, पहला मुद्दा वक्फ संपत्तियों से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा, जिन संपत्तियों को कोर्ट ने वक्फ घोषित कर दिया है, उन्हें वक्फ से हटाया नहीं जाएगा। चाहे वो वक्फ इस्तेमाल से बनी हो या घोषणा से, उन्हें वक्फ ही माना जाएगा।
2. दूसरा मुद्दा कलेक्टर की कार्यवाही से जुड़ा है। कलेक्टर अपनी कार्यवाही जारी रख सकते हैं। लेकिन, कुछ प्रावधान लागू नहीं होंगे। अगर कलेक्टर को कोई दिक्कत है, तो वो कोर्ट में अर्जी दे सकते हैं। कोर्ट उसमें बदलाव कर सकता है।
3. तीसरा मुद्दा बोर्ड और काउंसिल के गठन से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि ex officio सदस्य किसी भी धर्म के हो सकते हैं। लेकिन, बाकी सदस्य मुस्लिम ही होने चाहिए। इसका मतलब है कि कुछ खास पदों पर बैठे लोग बोर्ड में शामिल हो सकते हैं, चाहे वो किसी भी धर्म के हों। लेकिन, बाकी सदस्यों का मुस्लिम होना जरूरी है।

सुनवाई में कई सीनियर वकील मौजूद रहे
बता दें कि याचिकाकर्ताओं की तरफ से कई बड़े वकील सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहे। जैसे कि सीनियर एडवोकेट राजीव धवन, कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी, सी.यू. सिंह, राजीव शकधर, संजय हेगड़े, हुज़ेफ़ा अहमदी और शादान फ़रासात भी याचिकाकर्ताओं की तरफ से मौजूद हैं। वहीं दूसरी तरफ, सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में मौजूदद है। उनके साथ सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी और रंजीत कुमार भी हैं।

कई राज्यों ने भी दायर की थी याचिका
पहले, अंतरिम आदेश जारी होने की संभावना जाहिर की गई थी। बुधवार को कोर्ट ने आदेश लिखना शुरू किया था, लेकिन सॉलिसिटर जनरल और कुछ राज्यों के वकीलों ने अपनी बात रखने के लिए और समय मांगा था। इन राज्यों ने वक्फ अधिनियम का समर्थन करते हुए हस्तक्षेप याचिका दायर की है। वकीलों के अनुरोध पर मुख्य न्यायाधीश ने मामले को आज के लिए स्थगित कर दिया। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश ने कुछ शर्तों के साथ अंतरिम आदेश का मसौदा तैयार किया था, लेकिन विपक्षी पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं मिला।

शीर्ष कोर्ट ने 16 अप्रैल 2025 को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण यह पूरी नहीं हो सकी। यह मामला वक्फ बोर्ड और इससे संबंधित कानूनी प्रावधानों को लेकर है, जिसमें कई राज्य और केंद्रीय पक्ष शामिल हैं। कोर्ट का फैसला इस मामले में अगले कदमों को निर्धारित करेगा। यह सुनवाई न केवल वक्फ बोर्ड के लिए, बल्कि इससे जुड़े सभी पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है।

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