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Thursday, May 7, 2026
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रूस के लिए यूक्रेन से जंग लड़ने को किया गया मजबूर, घायल भी हुए, अब घर लौटा केरल का युवक

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तिरुवनंतपुरम

रूसी सेना की ओर से यूक्रेन के खिलाफ जंग के लिए मजबूर किए गए केरल के जैन टी के आखिर वतन लौट आए हैं। 27 साल के जैन युद्ध में घायल हो गए थे। गुरुवार को लौटे जैन ने बताया कि महीनों से मदद की गुहार और भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप के बाद घरवापसी संभव हुई। युवक के सही सलामत घर लौटने पर परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली। जैन टी कुरियन परिजनों ने उसे गले से लगा लिया।

साथी की हुई थी मौत
जैन टी कुरियन त्रिशूर जिले के वडक्कनचेरी के रहने वाले हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जनवरी की शुरुआत में एक ड्रोन हमले में बाल-बाल बचे। इस हमले में उनके रिश्तेदार बिनिल टी बी (32) की मौत हो गई थी। बिनिल का शव अभी तक केरल लाने के लिए मॉस्को में भारतीय अधिकारियों तक नहीं पहुंचा है। गंभीर रूप से घायल जैन पिछले चार महीनों से मॉस्को में इलाज करा रहे थे। उन्हें डर था कि इलाज के बाद उन्हें वापस युद्ध के मैदान में भेज दिया जाएगा। जैन ने कई बार इमरजेंसी कॉल किए, जिसके बाद भारतीय दूतावास ने हस्तक्षेप किया और उनकी दिल्ली और अंततः केरल में वापसी हो सकी।

जैन ने बताया सबकुछ
जैन ने बताया कि 6 जनवरी को रोस्तोव-ऑन-डॉन के पास वे घायल हो गए थे। यह जगह मॉस्को से लगभग 1,000 किलोमीटर दूर है। उनके पेट में चोटें आई थीं और मॉस्को के एक अस्पताल में उनकी कई सर्जरी हुई थीं। इस अस्पताल में युद्ध के मैदान में घायल हुए लोगों का इलाज किया जाता है। 22 अप्रैल को उन्हें वापस आर्मी कैंप में जाने के लिए कहा गया, क्योंकि अस्पताल से छुट्टी पाने वाले अन्य सभी लोगों को वापस लड़ाई में भेजा जा रहा था।उन्होंने 22 अप्रैल को अपने परिवार और दूतावास को सूचित किया, जिसके कारण उनकी रिहाई हो सकी। उन्हें नहीं पता कि रिश्तेदार बिनिल के बॉडी कहां हैं?

अप्रैल में गए थे रूस
बिनिल और जैन उन कई भारतीयों में शामिल थे, जिन्होंने अप्रैल में रूस गए थे। वे देश की सैन्य सहायता सेवा में इलेक्ट्रीशियन, कुक, प्लंबर और ड्राइवर के रूप में नौकरी की उम्मीद कर रहे थे। रूस पहुंचते ही उनसे भारतीय पासपोर्ट छोड़ने, स्थायी निवास लेने, रूसी सेना में भर्ती होने और युद्ध के मोर्चे पर काम करने के लिए कहा गया। पिछले साल अगस्त में केरल के संदीप की ड्रोन हमले में मौत हो गई थी। तब से, बिनिल और जैन घर वापस जाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कई वॉइस मैसेज भी भेजे थे, जिसमें कहा गया था कि उनकी जान खतरे में है और उन्हें मोर्चे पर जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। रूसी सेना के साथ उनका अनुबंध एक साल के लिए था, जो पिछले अप्रैल में शुरू हुआ था।

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