भोपाल
मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले की आंच अभी तक शांत नहीं हुई है। इस घोटाले से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में भोपाल की अदालत ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल सीट हासिल कर सरकारी डॉक्टर बने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना की अदालत ने आरोपी डॉ. सीताराम शर्मा को तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है।
अभियोजन के अनुसार, आरोपी सीताराम शर्मा ने वर्ष 2009 में पीएमटी (Pre-Medical Test) परीक्षा उत्तीर्ण की थी। मध्यप्रदेश राज्य कोटे का अवैध लाभ लेने के उद्देश्य से उसने मुरैना जिले की अम्बाह तहसील का एक कूटरचित (फर्जी) मूल निवासी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी है। उसने अपनी हाईस्कूल (1984) और इंटरमीडिएट (2001) की शिक्षा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से प्राप्त की थी।
अम्बाह तहसील के अभिलेखों की जांच में पाया गया कि आरोपी के नाम से कभी कोई मूल निवासी प्रमाण पत्र जारी ही नहीं किया गया था। दिग्विजय सिंह की शिकायत पर हुआ था खुलासा इस फर्जीवाड़े का खुलासा राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की शिकायत के बाद हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थी फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से मध्य प्रदेश की मेडिकल सीटों पर कब्जा कर रहे हैं।
दोषी डॉ. सीताराम शर्मा वर्तमान में जिला भिंड के शासकीय चिकित्सालय में चिकित्सा अधिकारी के पद पर पदस्थ था। प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक अखिल खान एवं सूयष बिजन सिंह भदौरिया ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया।
