भोपाल
राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने चिकित्सा सुविधाओं में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है। एम्स के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में अब थायराइड की गंभीर बीमारियों के लिए ‘रेडियो आयोडीन उपचार’ की आधुनिक सुविधा शुरू कर दी गई है। इस पहल से न केवल हाइपरथायरॉइडिज्म बल्कि थायराइड कैंसर (डिफरेंशिएटेड प्रकार) के मरीजों को भी विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा। दवाओं की लंबी निर्भरता से मिलेगा छुटकारा हाइपरथायरॉइडिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें थायराइड ग्रंथि अत्यधिक सक्रिय हो जाती है, जिससे मरीजों को सालों तक दवाइयां खानी पड़ती हैं। एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार, न्यूक्लियर मेडिसिन के तहत दी जाने वाली रेडियो आयोडीन थेरेपी एक सुरक्षित विकल्प है। यह ग्रंथि की अतिरिक्त सक्रियता को नियंत्रित करती है, जिससे मरीजों की दवाओं पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाती है।
थायराइड कैंसर: 90% मामलों में पूर्ण उपचार संभव कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि थायराइड कैंसर (डिफरेंशिएटेड) का सही समय पर पता चल जाए, तो 90 प्रतिशत मामलों में इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। आमतौर पर सर्जरी के बाद शरीर में बची हुई सूक्ष्म कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए रेडियो आयोडीन उपचार दिया जाता है। यह तकनीक न केवल बीमारी को जड़ से खत्म करती है, बल्कि इसके दोबारा होने की आशंका को भी न्यूनतम कर देती है। मध्य प्रदेश के मरीजों के लिए बड़ी राहत अब तक इस विशेष उपचार के लिए प्रदेश के मरीजों को दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े महानगरों के अस्पतालों में जाना पड़ता था, जो काफी खर्चीला और थकाने वाला होता था। एम्स भोपाल में इस सुविधा के विस्तार से अब स्थानीय स्तर पर ही सस्ता और प्रभावी इलाज उपलब्ध होगा
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