भोपाल। अपेक्स बैंक द्वारा जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के लिए की जा रही कर्मचारियों की भर्ती में राज्य शासन के दिव्यांगजन आरक्षण प्रावधानों का पालन न करने पर दिव्यांगजन आयुक्त न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय में हुई सुनवाई के बाद अपेक्स बैंक प्रबंधन ने अपनी तकनीकी चूक स्वीकार कर ली है और अब मूक व श्रवण बाधित दिव्यांगों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए अलग से तीन दिन का मौका देने का फैसला किया है। बैंक प्रबंधन जल्द ही तीन दिनों के लिए अपना ऑनलाइन पोर्टल खोलेगा, ताकि विज्ञापन की विसंगति के कारण आवेदन से वंचित रहे दिव्यांगजन फॉर्म भर सकें।
उल्लेखनीय है कि इस बैंक भर्ती के लिए आगामी 7 जुलाई को लिखित परीक्षा होनी तय है। न्यायालय आयुक्त में अपेक्स बैंक बनाम मध्यांचल बधिर संघ भोपाल के इस प्रकरण में देश का एक अनोखा नवाचार भी देखने को मिला। मूक-बधिर अनावेदक कमलेश डोंगरे बैंक के तर्कों को समझ सकें और अपना प्रतिवाद कर सकें, इसके लिए कोर्ट में पहली बार ‘इन्टरप्रिटर’ (दुभाषिए) के माध्यम से सुनवाई की गई।
इन्टरप्रिटर की मदद से कमलेश ने बैंक के दावों को चुनौती दी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने बैंक को नियमों के तहत शुद्धिपत्र जारी करने और पोर्टल री-ओपन करने के आदेश दिए। इस फैसले से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और मप्र दिव्यांगजन नियमों के जमीनी क्रियान्वयन को बड़ी मजबूती मिली है।
